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शाहजहांपुर डिप्रेशन जब सताए तो संगीत सुनकर हराएं

हिन्दुस्तान टीम,शाहजहांपुरPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 03:21 AM
 डिप्रेशन जब सताए तो संगीत सुनकर हराएं

इन दिनों लोग कोरोना की वजह से बहुत ज्यादा डिप्रेशन में हैं। वह संगीत चिकित्सा के जरिए अपने डिप्रेशन का हरा सकते हैं। कोरोना की वजह से कोई बीमार हुआ, किसी की मौत हो गई, किसी का व्यापार चौपट हो गया, किसी की नौकरी चली गई, इसका असर पूरे परिवार और कुनबे पर पड़ता है। खास महिलाओं पर जो बेहद भावुक होती हैं। डिप्रेशन यानी अवसाद के कारण लोग अपनी सेहत बिगाड़ लेते हैं। इस डिप्रेशन को हराने में संगीन चिकित्सा आपकी मदद कर सकती है। ऐसा एक शोध पत्र तैयार किया है शाहजहांपुर के एसएस कालेज की डा. कविता भटनागर ने। डा. कविता ने इस बार कोरोना की दूसरी लहर में संगीन सुनने पर ज्यादा जोर दिया है। उनका कहना है कि इस बार की जनक्षति बड़ी है। भुलाना तो आसान नहीं है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इससे उबरना कठिन हो। इसीलिए डा. कविता अपने नजदीकी लोगों, जानने वालों को मैसेज भेज कर संगीत सुनने पर जोर दे रही हैं।

डा. कविता कहती हैं कि संगीत का मन पर क्रियाशील प्रभाव पड़ता है, संगीत की विभिन्न शैलियां जैसे गीत, ग़ज़ल, भजन, ठुमरी इत्यादि किसी व्यक्ति के विचारों पर बहुत तेजी से प्रभाव डाल सकती हैं। यह उसे ख़ुशी से लेकर उत्तेजना, साथ ही उदासी, शांति और विचारशीलता तक भावनाओ की एक विस्तृत श्रृंखला का अनुभव और प्रक्रिया करने में मदद कर सकती हैं। संगीत मानसिक स्वास्थ्य के सुधार में भूमिका निभा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मधुर सामंजस्य और लय का एक चुनिन्दा संयोजन सांस लेने की दर, ह्रदयगति और शरीर के अन्य कार्यों को धीमा करके शांति की भावना को बढ़ावा दे सकता है।

टाक थैरेपी से बढ़ता है फील गुड हार्मोन

=डाक्टर कविता ने बताया कि टाक थैरेपी के साथ संगीत हमारी फील गुड नामक हार्मोन के स्तर को बढ़ाने में मदद कर सकता है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचार की स्पष्टता को उत्तेजित किया जा सकता है। वास्तव में संगीत चिंता के स्तर को कम करने और उदास व्यक्तियों के काम काज में सुधार लाने और उसको क्रियाशील बनाने में अत्यधिक प्रभावी है।

तेज और मध्यम संगीत के लाभ

=डा. कविता के अनुसार, तेज संगीत या बीट्स का प्रयोग जहां एक ओर आपकों व्यायाम, जुम्बा या ऐरोबिक्स की तरफ़ खींचता है, तो वहीं धीमा संगीत या बीट्स आपको अध्यात्म से जोड़ता है। दिमाग में उत्पन्न तनाव को शांत करके आपकी मांसपेशियों को आराम देता है, जिससे आप दिन भर तरोताज़ा महसूस कर सकते है, संगीत विश्राम और तनाव प्रबंधन के लिये उपयोगी है।

तनाव दूर करने के लिए ऐसा संगीत जरूरी

=प्रति मिनट 60 बीट्स के आस पास संगीत मस्तिष्क को बीट अल्फा ब्रेनवेव (8-14 हट्र्ज़ या प्रति सेकेण्ड चक्र) से आवृतियों के साथ सामंजस्य बनाने का कारण बन सकता है, यह अल्फा ब्रेनवेव वह है जो तब मौजूद होती है जब हम तनाव मुक्त और सचेत होते हैं।

नीदं क लिए सुनें शांत संगीत

=नींद को प्रेरित करने के लिए (5 हट्र्ज़ की एक डेल्टा ब्रेनवेव), एक व्यक्ति को आराम की अवस्था में और शांत संगीत सुनते हुए कम से कम खुद को 45 मिनट समर्पित करने की आवश्यकता होती है। संगीत सुनने से मष्तिष्क की कार्यप्रणाली दवा की तरह बदल जाती है।

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