ईरान-इजरायल जंग के बीच खाड़ी देशों की सात फ्लाइटें रद्द, 300 टिकट कैंसिल, भटकते रहे यात्री
ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं सामान्य नही हो सकी है। शुक्रवार को दुबई, आबूधाबी, शारजाह एवं रियाद की सात फ्लाइटें रद्द रहीं। जबकि दुबई से यहां पहुंची दो उड़ानों से 230 यात्रियों ने यात्रा की।

UP News: ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं सामान्य नही हो सकी है। शुक्रवार को दुबई, आबूधाबी, शारजाह एवं रियाद की सात फ्लाइटें रद्द रहीं। जबकि दुबई से यहां पहुंची दो उड़ानों से 230 यात्रियों ने यात्रा की। सीधी उड़ानों के रद्द होने से यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट का ही सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। जिससे यात्रियों को समय के साथ-साथ अधिक पैसा भी खर्च करना पड़ रहा है। शुक्रवार बंगलौर होकर अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे यात्रियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की।
उल्लेखनीय है कि चौधरी चरण सिंह अन्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट से खाड़ी देशों के लिए 17 उड़ानों का संचालन किया जाता था। इतनी फ्लाइटें आती हैं और जाती भी हैं। ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव और हमलों के बाद इनमें से अधिकतर उड़ानों को निरस्त कर दिया गया था। शुक्रवार को दुबई, जेद्दा, आबूधाबी, मस्कट को जाने वाले 08 विमानों ने उड़ान भरी, जबकि दुबई, जेद्दा, आबूधाबी व मस्कट से 06 विमान चौधरी चरण सिंह अन्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरे। एयरपोर्ट सूत्रों की माने तो शुक्रवार को निरस्त हुई सात उड़ानों के 300 से अधिक यात्रियों ने अपने टिकट निरस्त कराए। एयरलाइनों की ओर से अब तक करीब सवा दो लाख रुपये का रिफंड जारी किया गया।
यात्रा का समय बढ़ गया
देवरिया के रहने वाले मोहम्मद शोएब शुक्रवार को एयर इंडिया की उड़ान से बंगलूरू होकर अमौसी एयरपोर्ट पहुंचे। शोएब ने बताया कि सीधी फ्लाइट रद्द होने के कारण हमें दुबई से पहले बेंगलुरु आना पड़ा और वहां से दूसरी फ्लाइट लेकर लखनऊ पहुंचे। इससे यात्रा का समय भी बढ़ गया और किराया भी काफी ज्यादा देना पड़ा। शोएब ने बताया कि उनका रोजा चल रहा है, हमले बाद उन्हें सामान की खरीदारी में दिक्कत हो रही थी। हालांकि उन्हें एयरपोर्ट पहुंचने में कोई दिक्कत नही हुई।
बेंगुलुरू से कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ी
खलीलाबाद के हरने वाले दीपचन्द्र ने बताया कि सीधी उड़ान से 4-5 घंटे में लखनऊ पहुंच जाते थे, लेकिन अब कनेक्टिंग फ्लाइट के कारण 10 से 12 घंटे लग रहे हैं। युद्ध के कारण यात्रियों को काफी पोरेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पहले उन्होंने सीधा उड़ान से टिकट बुक कराया था, लेकिन हमले के बाद उनकी फ्लाइट निरस्त कर दी गई। जिसके बाद उन्हें बंगलूरू होकर आना पड़ा।
दो उड़ानों से पहुंचे 230 यात्री
शुक्रवार को दुबई की दो फ्लाइटें 230 यात्रियों को लेकर चौधरी चरण सिंह अन्तराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंची। एयरपोर्ट सूत्रों के मुताबिक फ्लाई दुबई की उड़ान (एफजेड-443डी) शुक्रवार की सुबह 05:20 बजे अमौसी एयरपोर्ट पहुंची। इस उड़ानों से 89 यात्रियों ने यात्रा की। जबकि दूसरी उड़ान (एफजेड-334) सुबह 10:50 बजे अमौसी एयरपोर्ट पहुंची। इस उड़ान से 141 यात्री लखऊ पहुंचे। जबकि यहां से सुबह 06:20 बजे दुबई के लिए रवाना हुई फ्लाई दुबई की उड़ान (एफजेड-444डी) से एक व (एफजेड-444) से 29 यात्रियों ने दुबई के लिए उड़ान भरी।
इनसेट-पांच इंटरनेशल फ्लाइट रद्द
एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र के एयरस्पेस में सुरक्षा कारणों से उड़ानों के संचालन पर असर पड़ा है। इसी के चलते शुक्रवार को यहां आने वाली पांच अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द करना पड़ा। शुक्रवार सुबह 06:05 बजे अबू धाबी से लखनऊ पहुँचने वाली इंडिगो की फ्लाइट (6ई-1416) और 11:30 बजे दुबई से आने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट (आईएक्स-194) रद्द कर दी गई।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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पत्रकारिता का सफर
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उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


