सात बार की जान देने की कोशिश, हर बार परिवार ने बचा लिया; लेकिन आठवीं बार...
50 वर्षीय चुन्नीलाल CPC गोदाम में पल्लेदारी का काम करते थे। परिवार में पत्नी रानीपाल, बेटे गुड्डू, बबलू और साजन के अलावा 2 बेटियां हैं। छोटे भाई पप्पू ने बताया कि चुन्नीलाल शिवरात्रि से काम पर नहीं जा रहे थे। इस दौरान वह बार-बार जान देने की बात कहते थे। यह भी कहते थे कि ‘इस बार मुझे कोई बचाना नहीं’।

किसी बात से तनाव में चल रहे कानपुर के सनिगवां के लउवापुरवा में रहने वाले 50 वर्षीय शख्स ने गुरुवार रात को फंदा लगाकर जान दे दी। इससे पहले भी वह सात बार जान देने का प्रयास कर चुका था। बुधवार को भी फंदे से लटक गया था, लेकिन समय पर पहुंचे परिजनों ने उसे बचा लिया था। इस व्यक्ति की जान सात बार तो बचा ली गई लेकिन आठवीं बार ऐसा नहीं हो सका। इस बार उसने जब आत्महत्या की कोशिश की तो परिवार के लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। आत्महत्या की कोशिश के दौरान उस पर किसी का ध्यान नहीं गया और वह अपनी कोशिश में सफल हो गया। परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
लउवापुरवा में रहने वाले 50 वर्षीय चुन्नीलाल सीपीसी गोदाम में पल्लेदारी का काम करते थे। परिवार में पत्नी रानीपाल, बेटे गुड्डू, बबलू व साजन के अलावा दो बेटियां हैं। छोटे भाई पप्पू ने बताया कि चुन्नीलाल शिवरात्रि से काम पर नहीं जा रहे थे। इस दौरान वह बार-बार जान देने की बात कहते थे। यह भी कहते थे कि ‘इस बार मुझे कोई बचाना नहीं’।
बुधवार को उन्होंने कमरे के अंदर फांसी लगाने का प्रयास किया लेकिन घर वालों ने उन्हें बचा लिया था। गुरुवार को परिवार के लोग अपने कामों में व्यस्त थे। इसी दौरान कमरे के अंदर जाकर चुन्नीलाल ने फांसी लगा ली। इससे पहले भी वह छह बार जान देने का प्रयास कर चुके थे। चकेरी इंस्पेक्टर अजय मिश्रा ने बताया कि किसी बात से तनाव में चल रहे चुन्नीलाल ने जान दे दी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
कुछ लोगों में होती है आत्महत्या की प्रवृति
कुछ लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति होती है। सुसाइडल टेंडेंसी वाले ये लोग गहरे मानसिक तनाव, अवसाद या असहनीय भावनात्मक पीड़ा के शिकार होते हैं। ऐसे लोगों के व्यवहार को देखकर गंभीर समस्या का संकेत मिलते हैं। यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या की बात करे या निराशा महसूस करे, तो उसे तुरंत प्यार, सहयोग और पेशेवर मदद (मनोचिकित्सक) की आवश्यकता होती है। काउंसलिंग के जरिए आत्महत्या की प्रवृति को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अक्सर देखा जाता है कि जो लोग बार-बार निराशाजनक बातें करते और आत्महत्या की बात करते हैं वे जरा से तनाव की स्थिति में भी खौफनाक कदम उठा लेते हैं। परिवार या आसपास के किसी शख्स को ऐसी स्थिति में देखकर तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए और भावनात्मक कठिनाइयों के शिकार व्यक्ति को मदद मुहैया कराई जानी चाहिए।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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