
बोतल बंद पानी बनाने वाली 07 फर्मों से सील किया गया पानी का नमूना
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर में पानी की जांच का अभियान चलाया जा रहा है। मध्य प्रदेश में दूषित पानी से 18 मौतों के बाद शासन के निर्देश पर जिले में बोतल बंद पानी के 8 नमूने सील किए गए हैं। सभी फैक्ट्रियों को सफाई मानक सुधारने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में भी पानी की जांच का अभियान किया जा रहा है। दूषित पानी पीने से मध्य प्रदेश में 18 मौतें होने के बाद शासन के निर्देश पर समूचे जिले में बोतल बंद पानी की जांच का अभियान संचालित किया जा रहा है। इस दौरान सात फर्मों से पानी के आठ नमूने सील किए गए हैं। शहर में लोगों को बोतलबंद पानी किस प्रकार का पिलाया जा रहा है। इसकी हकीकत को जानने के लिए जिले भर में अभियान चला कर पानी का आठ नमूना सील किया गया है। सभी ब्रांड का पानी बाजार के बाजाए फर्म से ही संकलित किया गया है।
मौके पर पहुंची टीम को वहां पर खामियां भी दिखीं और सभी को सुधार करने के लिए निर्देश भी दिए गए हैं। यदि फैक्ट्रियों में सुधार नहीं किया गया तो उन्हें फौरी तौर पर सील कर दिया जाएगा। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय सतीश कुमार ने बताया कि पानी के आठ नमूने सील किए गए हैं। सभी नमूनों की जांच के लिए प्रदेश स्तरीय लैब में भेज दिया गया है। लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद पानी दूषित पाया गया तो बोतल बंद पानी पैक करने वाली उस फैक्ट्री को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा। साथ ही विधिक कार्रवाई की जाएगी। ----------------------------------- सभी फैक्ट्री में दिखीं खामियां दिए सख्त निर्देश सभी बोतल बंद पानी बनाने वाली फैक्ट्रियों पर छापेमारी के दौरान खामियां साफ दिखी। सफाई मानक के अनुरूप नहीं रही। सफाई ठीक नहीं होने की वजह से सभी फर्मों को नोटिस थमाई गई है। सभी फर्मों को सफाई व्यवस्था ठीक करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा पानी की फैक्ट्री में काम करने वाले सभी श्रमिकों का मेडिकल फिटनेस बनाने का निर्देश दिया है। इसके आलवा इन केंद्रों पर एफएसएसआई चार्ट और अल्ट्रावायलेट रेज को देखा गया है। ------------------------ इकोलाई बैक्टीरिया की जांच पर जोर मध्य प्रदेश के इंदौर में मौत का तांडव मचाने के लिए इकोलाई बैक्टीरिया को जिम्मेदार माना जा रहा है। यही कारण है कि जिले का खाद्य एवं औषधि विभाग यह जानने की कोशिश कर रहा है कि कहीं बोरबेल से निकलने वाले पानी में इकोलाई बैटक्टीरिया तो नहीं है। बैक्टीरिया की जांच के लिए पानी के नमूनों को सील किया गया है। इस बैक्टीरिया को डायरिया के लिए जिम्मेदार माना जाता है। डायरिया होने पर शरीर से पानी तेजी के साथ निकलने लगता है। दवाओं के चलने के बाद भी चार से पांच दिन तक इस प्रकार की डायरिया का असर होता है। यही कारण है कि विभाग ने इकोलाई बैक्टीरिया की तलाश में पानी का नमूना सील किया है।

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