फोरलेन निर्माण में पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

Newswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
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Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले में बीएमसीटी मार्ग के फोरलेन निर्माण के लिए बड़ी संख्या में हरे पेड़ों की कटाई हो रही है। समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पेड़ों की कटाई से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और स्थानीय लोग गर्मी और प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं।

 फोरलेन निर्माण में पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में बीएमसीटी मार्ग को फोरलेन सड़क निर्माण के नाम पर बड़े पैमाने पर हरे पेड़ों की कटाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इसे लेकर समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद अहमद ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में पत्र में आरोप लगाया गया है कि फोरलेन निर्माण के नाम पर सड़क के दोनों किनारों पर लगे हरे-भरे पेड़ों को अतिक्रमण हटाने की आड़ में काटा जा रहा है। इसमें संबंधित ठेकेदारों के साथ कुछ स्थानीय लोगों की संलिप्तता भी बताई गई है।

आरोप है कि कई स्थानों पर बिना आवश्यकता के भी पेड़ों की कटाई की जा रही है। पेड़ों की कटान से क्षेत्र की हरियाली तेजी से समाप्त हो रही है। श्री अहमद ने कहा कि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से न केवल पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। बल्कि स्थानीय लोगों में भी आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पुराने पेड़ अचानक काटे जाने से गर्मी और प्रदूषण का असर बढ़ेगा। पत्र में यह भी मांग की गई है कि जहां सड़क निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई अत्यंत आवश्यक हो, वहीं सीमित संख्या में ही पेड़ काटे जाएं। साथ ही, उसके बदले पर्याप्त संख्या में वृक्षारोपण सुनिश्चित कराया जाए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे।उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएं और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।-------------------------------------------चौराहों पर छांव को तरसेंगे राहगीरफोरलेन निर्माण के दौरान हो रही पेड़ों की कटाई का असर अब आम जनजीवन पर भी साफ दिखने लगा है। खासकर चौराहों और सड़क किनारे लगे पुराने छायादार पेड़ कटने से राहगीरों को भीषण गर्मी में राहत नहीं मिल पाएगी। पहले जहां लोग धूप से बचने के लिए पेड़ों की छांव में कुछ देर ठहर जाते थे, वहीं अब खुले आसमान के नीचे खड़े रहने को मजबूर होंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि राहगीरों के लिए प्राकृतिक सहारा भी होते हैं। ऐसे में बिना समुचित विकल्प के इनकी कटाई चिंता का विषय बन गई है।--------------------------------------------सुनसान हुए चौराहे, नहीं दिख रही हरियालीबीएमसीटी मार्ग के प्रमुख चौराहों की तस्वीरअब पूरी तरह बदल गई है। जहां कभी घने और छायादार पेड़ों की हरियाली नजर आती थी, वहीं अब कटान के बाद चौराहे सुनसान और उजाड़ दिखाई देने लगे हैं। पेड़ों के हटने से न सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य खत्म हुआ है, बल्कि क्षेत्र का तापमान भी बढ़ने लगा है। दुकानदारों व ग्रामीणों ने कहा कि पहले इन चौराहों पर पेड़ों की छांव में राहगीर, दुकानदार व ग्रामीण कुछ देर आराम कर लेते थे, जिससे चौराहों पर रौनक बनी रहती थी। अब पेड़ों के अभाव में न तो छांव बची है और न ही पहले जैसी चहल-पहल दिखाई देती है। दिन में तेज धूप के कारण लोग यहां रुकने से कतराने लगे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ चौराहों पर पुनः वृक्षारोपण कराया जाए, ताकि हरियाली और जनसुविधा दोनों को संतुलित किया जा सके।

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