
अच्छी तनख्वाह पर बुलाए थाईलैंड, सिखा रहे थे साइबर अपराध
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले से अच्छी तनख्वाह पाने की लालच में थाईलैंड गए
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले से अच्छी तनख्वाह पाने की लालच में थाईलैंड गए चार युवक साइबर अपराध में घसीटने वाले गैंग के चंगुल में फंस गए। भारतीय दूतावास की मदद से वापस लौटे तो साइबर क्राइम थाने के पुलिस कर्मियों की पूछताछ में दास्तां सुनाई। बताया कि विदेश में अच्छी तनख्वाह पर सुपर माल में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवकों को बुलाकर साइबर अपराध में घसीटने वाला गैंग सक्रिय है। धोखाधड़ी के इस नए तरीके को जालसाज अपना कर युवाओं को साइबर फ्राड के जाल में फंसा रहे हैं। कांशीराम शहरी आवास के रहने वाले पीड़ित मनीष बताते हैं कि वे स्नातक है और शहर में प्राइवेट संस्था में कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करते थे।

टेलीग्राम पर विदेश जाकर पैसा कमाने का एड मिला तो उन्हें लगा कि विदेश जाकर वह अच्छी तनख्वाह हासिल कर सकते हैं। टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क किया तो टेलीग्राम आईडी धारक एजेंट ने 80 हजार रुपये पर बैंकाक में सुपरमॉल में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। टूरिस्ट बीजा पर आने पर वहां वर्किंग बीजा दिलाने का जिक्र किया। 29 सितंबर 2025 को वह अपने खलीलाबाद के ही रहने वाले दोस्त अबूतालिब के साथ लखनऊ गए और फिर हेलीकाप्टर से बैंकाक गए। वहां एयरपोर्ट से बाहर निकले तो एक गाड़ी आई। उसमें उन दोनों के अलावा कई व्यक्ति बैठे थे। उनके जरिए हम लोगों की मोबाइल ले ली गई। कई गाड़ी बदलते हुए उन लोगों को एक जगह ले जाया गया, वहां के परिसर में काफी संख्या में लोग रहते थे। वहां उन लोगों को फर्जी फेसबुक व अन्य आईडी बनाने की ट्रेनिंग दी जाने लगी। उन लोगों को लड़की बन कर लड़कों से बात कराया जाता था। वे लोग अंग्रेजी नहीं आने का जिक्र करके वापस घर जाने की बात किए तो उनसे पांच लाख रुपये की मांग होने लगी। वहां पाकिस्तान,श्रीलंका, नेपाल, अफ्रीका आदि देशों के लोग मिले। वे लोग 20 दिन तक वहां रहे। उनकी मोबाइल को फार्मेट मार दिया गया था। किसी ने मामले की सूचना दी तो थाईलैंड की आर्मी ने छापा मारा। करीब 12 दिन तक वे लोग डिटेंशन सेंटर में रहे। फिर भारतीय दूतावास की मदद से छह नवंबर 2025 को भारत के 270 लोग फ्लाइट से लाए गए। उन लोगों से नोएडा में पूछताछ की गई और फिर लखनऊ तक भेजवाया गया। उसके बाद वे लोग अपने घर सुरक्षित लौट पाए। साइबर थाने के एसओ जय प्रकाश चौबे ने बताया कि बैंकाक से लौट कर आए मनीष, मोहम्मद अशद अंसारी,जमीरुल्लाह और अबूतालिब से पूछताछ की गई। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई। हरियाणा के कुनाल के माध्यम से बैंकाक गया मोहम्मद अशद खलीलाबाद के रहने वाले मोहम्मद अशद अंसारी ने बताया कि वे बीएससी किए है। खलीलाबाद के कई प्रतिष्ठानों में कंप्यूटर का काम कर चुके है। वह दिल्ली में नौकरी कर रहे थे। वहीं पर अप्रैल में वहां कुनाल नाम के हरियाणा के युवक से संपर्क हुआ। उसी के माध्यम से मई 2025 में टूरिस्ट बीजा पर सुपर माल में नौकरी करने के लिए बैंकाक गए,जहां उन्हें जबरियां साइबर अपराध की ट्रेनिंग दी जाने लगी। उसने बताया कि तकदीर अच्छी थी कि भारतीय दूतावास की मदद से घर वापसी हो पाई। फर्जी एड के चक्कर में फंसकर जमीरुल्लाह पहुंचे बैंकाक बखिरा क्षेत्र के रहने वाले जमीरुल्लाह बताते हैं कि वे दुबई में सेल्स मैनेजर का काम करते थे। महीने में 40 हजार पगार मिलता था, लेकिन कंपनी हर महीने वेतन नहीं देती थी। आन लाइन एड देखे और मैसेंजर से बात हुई तो उसके बताए मुताबिक टूरिस्ट बीजा पर बैंकाक गए। वहां पर उन्हें फर्जी फेसबुक व अन्य आईडी बनाने की ट्रेनिंग दी जा रही थी। खुदा का शुक्र था कि भारतीय दूतावास की मदद से घर लौट पाए। खुद रहें सतर्क और हासिल करें सही जानकारी साइबर क्राइम एक्सपर्ट कांस्टेबल राम प्रवेश मद्धेशिया बताते हैं कि जालसाज सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर नौकरी के ऑफर डालकर वे लोगों को आकर्षित करते हैं। ऑफर में अक्सर एक विदेशी देश में काम करने का और ऊंची सैलरी का वादा होता है। खासकर एशियाई देशों जैसे लाओस, वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार आदि देशों में ऊंची सैलरी का लालच देकर युवकों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। इन देशों में भेजे गए लोगों को विजिटर वीजा पर भेजा जाता है, बाद में बंधक बना लिए जाते हैं और उन्हें साइबर अपराधों में शामिल कर लिया जाता है। यह अपराधी इनसे ऑनलाइन ठगी, जैसे कि कस्टमर सपोर्ट स्कैम, इंवेस्टमेंट फ्रॉड या अन्य तरह के धोखाधड़ी का काम कराते हैं। बंधकों को धमकी दी जाती है कि अगर उन्होंने इन अपराधों में भाग नहीं लिया तो उनका शारीरिक या मानसिक शोषण किया जाएगा। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि नौकरी के ऑफर्स पर संदेह रखें, अगर कोई नौकरी का ऑफर बहुत आकर्षक लगता है या आपको बहुत कम समय में विदेश भेजने का वादा किया जा रहा है, तो ऐसे ऑफर्स पर संदेह करें। इसके बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने की कोशिश करें। सरकारी और अधिकृत एजेंटों से संपर्क करें। किसी भी आपातकालीन स्थिति में भारतीय दूतावास से संपर्क करने के लिए उनके हेल्पलाइन नंबर की जानकारी रखें। एसपी संदीप कुमार मीना ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी को पहचाने और इसके बारे में जागरूकता फैलाएं। विदेश यात्रा से पहले सही जानकारी और उचित रास्तों का पालन करना बहुत जरूरी है। केवल सरकार, पुलिस और दूतावास ही नहीं, बल्कि समाज को भी इस अपराध के खिलाफ जागरूक होना पड़ेगा। सभी को इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए सतर्क रहना चाहिए और अगर किसी को शंका हो तो उसे तुरंत अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।

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