कल से शुरू होगा अधिक मास, शिवालयों में होगा पूजन अर्चन

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Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के शिवालयों में कल से शुरू हो रहे अधिक

कल से शुरू होगा अधिक मास, शिवालयों में होगा पूजन अर्चन

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के शिवालयों में कल से शुरू हो रहे अधिक मास में पूजन अर्चन होगा। लोग मंदिरों में पूजन अर्चन करेंगे। बाबा कंकड़ेश्वर नाथ मन्दिर पौली में अधिक मास की महिमा का बयान करते हुए आचार्य वशिष्ठ मुनि चतुर्वेदी ने बताया कि सनातन धर्म में अधिक मास का विशेष महत्व है। इसे पुरुषोत्तम मास व मलमास के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों इसकी महिमा अत्यंत महान बताई गई है। इस माह अपने आराध्य देव का पूजन व जप करें। अधिक मास में शिवालयों में पूजन-अर्चन व अनुष्ठानों का आयोजन होगा। इस माह मे ईश्वर उपासना से सुख समृद्धि मिलती है।

अधिक मास का महत्व

उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इसे अपना नाम प्रदान किया इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार जिस महीने में सूर्य का राशि परिवर्तन नहीं होता, अर्थात कोई संक्रांति नहीं पड़ती, वह माह अधिक मास के नाम से जाना जाता है। इस माह में किया गया छोटा सा भी धर्म कार्य आपको काफी पुण्य दिला सकता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अधिक मास से कहा कि संसार में लोग मुझे पुरुषोत्तम कहते हैं, इसलिए आज से तुम्हें भी पुरुषोत्तम मास कहा जाएगा और इस मास में किए गए श्रेष्ठ कार्य अनेक गुना फल प्रदान करेंगे।

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क्या होता है अधिक मास

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर 3 साल में आने वाले एक अतिरिक्त चंद्र मास को अधिक मास कहते हैं। यह सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के कैलेंडर के बीच के दिनों के अंतर को बराबर करने के लिए जोड़ा जाता है। इसे आध्यात्मिक रूप से बहुत पवित्र माना जाता है। चंद्रमा वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष (सूर्य की गति) 365 दिनों का होता है। इस तरह प्रत्येक वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर आ जाता है। इसी बराबर को बनाए रखने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है।

अधिक मास में मांगलिक कार्य

ज्योतिषाचार्य आचार्य कृपाशंकर पाण्डेय ने बताया कि अधिक मास में सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करते यानि संक्रांति नहीं होती है। इसलिए इस दौरान शादी, मुंडन, गृह प्रवेश और नया व्यापार शुरू करने जैसे सांसारिक मांगलिक कार्य वर्जित किए जाते हैं। अधिक मास के दौरान कथाओं को सुनना या फिर उनका पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इसलिए इस माह श्रीमद्भागवत, भगवत गीता, शिवपुराण, गणेश पुराण या फिर अन्य पवित्र ग्रंथों का पाठ और श्रवण कर सकते हैं। इससे आपके सभी पापों का नाश हो सकता है। जप, तप, स्तुति, मंत्र आदि का जाप करना लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति रोजाना एक माला अपने आराध्य के मंत्रों का जप करता है उसके सारे मनोरथों की पूर्ति होती है।

अधिक मास से संबंधित सामान्य प्रश्न

अधिक मास क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हर 3 साल में आने वाले एक अतिरिक्त चंद्र मास को अधिक मास कहते हैं।
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