गैर इरादान हत्या करने के आरोपी को 3 वर्ष की सजा
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले के सत्र न्यायधीश ने गैर इरादतन हत्या के आरोपी सुधाकर साहनी को 03 वर्ष की सजा सुनाई। आरोपी पर 10,000 रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया, तो उसे 06 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। यह मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा है।

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के सत्र न्यायधीश ने गैर इरातदन हत्या के मामले के आरोपी को 03 वर्ष की सजा सुनायी। इसके साथ ही 10000 रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थदंड की अदायगी न करने पर 06 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि धनघटा थाना क्षेत्र के सोनाड़ी निवासी जगदंबा प्रसाद चौरसिया ने थाना धनघटा में प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें बताया कि 31 जनवरी 2018 को समय करीब 05 बजकर 18 मिनट पर उनका लड़का अभय कुमार घर के सामने दक्षिण तरफ सब्जी लेने गया था। तब तक उनके भाई का नाती बृजेश मोटर साइकिल से आ गए और वहीं खड़े होकर उनके लड़के से बातचीत करने लगे।
इसी बीच उनका पड़ोसी सुधाकर साहनी पुरानी रंजिश को लेकर दूसरे की स्कार्पियो गाड़ी चलाते हुए उनके लड़के अभय व ब्रजेश चौरसिया की मोटर साइकिल पर चढ़ा दिए। जिससे अभय की मृत्यु हो गयी। गाड़ी चालू हालत में छोड़ कर भाग गए। अगल- बगल के लोग किसी तरफ से गाड़ी के नीचे से निकालकर मलौली हास्पिटल ले गए जहां पर डॉक्टर ने उनके लड़के अभय को मृत घोषित कर दिया। बृजेश की हालत गंभीर देखत हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बाद में जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। सुधाकर दबंग व शराबी व्यक्ति है। होली के दिन वर्ष 2017 में शराब पीकर सुधाकर उनके लड़के का शर्ट फाड़ दिया था और दोनों में आपसी विवाद हुआ था। अभय को सुधाकर ने थप्पड़ मार दिया था। सुधाकर ने कहा था कि मैं तुम्हें जान से मार दूंगा। इसी रंजिश को लेकर सुधाकर ने गाड़ी चढ़कर उनके लड़के को मार डाला।मामले में थाना धनघटा में मुकदमा पंजीकृत हुआ तथा विवेचक द्वारा विवेचना के उपरांत आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि अभियोजन की तरफ से 10 साक्षियों का साक्ष्य कराया गया। साक्षियों ने आयोजन कथानक का समर्थन किया। आरोपी सुधाकर साहनी के विरुद्ध आरोप साबित पाए जाने पर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी सुधाकर साहनी को दोषी मानते हुए 03 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ 10 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया। अर्थदंड न अदा करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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