
संतान की रक्षा व मनोकामनाएं पूरा करने का पावन पर्व है संकष्टी चतुर्थी व्रत
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर में संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। महिलाएं इस दिन भगवान गणेश की पूजा कर संतान सुरक्षा और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। माघ मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व है, जिसे संकटों का नाश करने वाली चतुर्थी माना जाता है।
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है। महिलाएं निर्जला व्रत रख कर संतान सुरक्षा व परिवार के सुख समृद्धि की कामना करती हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत के महत्व को बताते हुए आचार्य पं. कृपाशंकर पान्डेय ने कहा कि प्रत्येक माह में दो चतुर्थी तिथि आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में जिसे विनायक चतुर्थी कहते हैं और दूसरी कृष्ण पक्ष में जिसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
लेकिन सभी चतुर्थियों में माघ मास की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना गया है। इसे षकठ चौथ, माघी चौथ, संकटा चौथ, तिलकुट चौथ आदि नामों से जाना जाता है। संकष्टी चतुर्थी का अभिप्राय है संकटों का हरण करने वाली चतुर्थी। इस दिन भगवान गणेशजी के साथ-साथ भगवान शिव, माता पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और चंद्रदेव की पूजा का विधान है। महिलाएं अपने संतान की दीर्घायु और खुशहाल जीवन की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। नारद पुराण के अनुसार इस दिन भगवान गजानन की आराधना से सुख-सौभाग्य में वृद्धि तथा घर-परिवार पर आ रही विघ्न -बाधाओं से मुक्ति मिलती है। रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। इस चतुर्थी में चन्द्रमा के दर्शन करने से गणेश जी के दर्शन का पुण्य फल मिलता है। -------------------------- संकटा चौथ पर गणेश आराधना की विधि इस दिन व्रत रखकर भगवान गजाननजी की विधि पूर्वक आराधना की जाती है। उन्हें तिल-गुड़ के बने लड्डुओं या गुड़-तिल से बने तिलकुट का भोग लगाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को व्रत का संकल्प लेकर व्रती महिलाएं प्रातः से चंद्रोदय काल तक नियमपूर्वक रहें। सायंकाल लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर मिट्टी के गणेश एवं चौथ माता की तस्वीर स्थापित करें। रोली, मोली, अक्षत, फल, फूल आदि श्रद्धा पूर्वक अर्पित करें। गणेशजी एवं चौथ माता को प्रसन्न करने के लिए तिल और गुड़ से बने हुए तिलकुटे का नैवेद्य अर्पण करें।

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