जनपद के 121 ग्राम प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले में स्वच्छता मद की धनराशि के गलत तरीके से आहरण के मामले में 121 ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कुल 3 करोड़ 78 लाख 19 हजार 784 रुपए का भुगतान फर्मों के खाते में किया गया था। जांच के बाद सभी दोषियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में स्वच्छता मद की धनराशि का नियम विरुद्ध तरीके के सामग्री सप्लाई करने वाली फर्मों के खाते में स्थानांतरित कर व्यय किए जाने के मामले में रिकवरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अभी तक पूर्व डीपीआरओ, पटल सहायक के विरुद्ध कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा भुगतान लेने वाली सभी फर्मों को भी नोटिस जारी किया गया था। लेकिन अब जिलाधिकारी ने प्रधान और सचिव को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। सभी का स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वच्छता मद में आई धनराशि का जनपद में आहरण जिम्मेदारों ने नियम विरुद्ध तरीके से कर लिया था। 121 ग्राम पंचायतों ने कुल 3 करोड़ 78 लाख 19 हजार 784 रुपए का भुगतान फर्मों के खाते में प्रधान, सचिवों ने मिलीभगत करते हुए कर दिया था। इस प्रकरण की जांच हुई तो मामला खुलकर सामने आया। अधिकारियों की सख्ती के बाद धनराशि वापस से खाते में जमा करा दी गई। लेकिन जांच में गलत तरीके से धनराशि आहरण करने के दोषी ग्राम प्रधान और सचिव पाए गए हैं। इसके अलावा धनराशि प्राप्त करने वाली फर्में भी दोषी पाई गईं। सभी नौ ब्लाकों के 121 ग्राम प्रधान और उन सभी ग्राम पंचायतों के सचिवों को नोटिस जारी किया गया है। जिलाधिकारी ने सभी दोषी ग्राम प्रधानों और सचिवों से साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण तलब किया है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। फर्मों को पहले ही जारी हो गई थी नोटिस डीएम के निर्देश पर एडीओ पंचायत स्तर से सभी फर्मों को नोटिस भेजा गया है। एक सप्ताह के भीतर सभी से जवाब तलब किया गया था। कुछ फर्मों से जवाब दिया है, कुछ का आना शेष है, अब इनके विरुद्ध कार्रवाई की तैयारी चल रही है। यह था पूरा मामला स्वच्छता मद में आई धनराशि का जनपद में आहरण जिम्मेदारों ने नियम विरुद्ध तरीके से कर लिया था। 145 ग्राम पंचायतों ने कुल 3 करोड़ 78 लाख 19 हजार 784 रुपए का भुगतान फर्मों के खाते में प्रधान, सचिवों ने मिलीभगत करते हुए कर दिया था। हालांकि तत्कालीन डीपीआरओ ने इस प्रकरण में एक पत्र भी जारी किया था। जिसके बाद सभी ने धनराशि को व्यय किया। प्रकरण में पूर्व में जांच हुई तो मामला खुला। जांच में सामने आया कि 121 ग्राम पंचायतें ऐसी रहीं जिन्होंने धनराशि का आहरण किया था। शेष 24 ग्राम पंचायतों में आहरण की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि सभी ग्राम पंचायतों ने आहरित की गई धनराशि को जमा भी कर दिया है। इस प्रकरण में एक सचिव, प्रधान और फर्म पर महुली थाने में मुकदमा भी हुआ था। पिछले दिनों जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इसका संज्ञान लिया और समस्त पत्रावली विस्तृत आख्या के साथ तलब किया। जिला पंचायत राज अधिकारी, उपायुक्त श्रम रोजगार एवं जिला विकास अधिकारी की विस्तृत जांच आख्या पर मुख्य विकास अधिकारी ने 29 अगस्त को अग्रसारित किया। इस आख्या में तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों पर वित्तीय अनियमितता किए जाने और शासकीय धनराशि के गबन की पुष्टि की। इसके बाद जिलाधिकारी ने तत्कालीन सभी जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए। दो पूर्व डीपीआरओ के विरुद्ध शासन को भेजा जा चुका है पत्र स्वच्छता मद की धनराशि के आहरण में अनियमितता में तत्कालीन डीपीआरओ उमाशंकर मिश्र और राजेन्द्र प्रसाद भी दोषी पाए गए थे। सीडीओ ने 12 सितंबर को इनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए निदेशक पंचायती राज को पत्र लिखा था। इसके अलावा पटल सहायक और जिला सलाहकार के विरुद्ध कार्रवाई की भी संस्तुति की जा चुकी है।

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