सरकारी नौकरी नहीं मिलने से हताश रेडियोग्राफर हुआ था लापता

Newswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
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Santkabir-nagar News - हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर। कोशिशों के बावजूद सरकारी नौकरी नहीं मिलने से हताश रेडियोग्राफर खुद

सरकारी नौकरी नहीं मिलने से हताश रेडियोग्राफर हुआ था लापता

हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर। कोशिशों के बावजूद सरकारी नौकरी नहीं मिलने से हताश रेडियोग्राफर खुद लापता हो गया। करीब ढाई महीने तक मोबाइल बंद करके वाराणसी से लेकर उत्तराखंड,गोवा और मुंबई में घूमता रहा। इधर परेशान परिजन लापता रेडियोग्राफर को ढूंढने के लिए एसपी से लेकर एडीजी जोन गोरखपुर और मुख्यमंत्री के दरबार तक गुहार लगा चुके थे। गोरखपुर और संतकबीरनगर की पुलिस तलाश में जुटी रही। सर्विलांस की मदद कारगर हुई और लोकेशन के जरिए मुंबई के नरीमन प्वाइंट पर पुलिस टीम को रेडियोग्राफर मिला तो परिजनों के साथ-साथ पुलिस ने भी राहत की सांस ली।धनघटा थाना क्षेत्र के गोपीपुर के रहने 25 वर्षीय रजत पांडेय पुत्र सतीश पांडेय दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में रेडियोग्राफर पद पर कार्यरत थे।

वे सात फरवरी 2026 को रात नौ बजे दिल्ली से प्राइवेट बस से घर के लिए चले, लेकिन घर नहीं पहुंचे। पीड़ित बहन डॉक्टर ख्याति पांडेय और सेमरा बाईपास खलीलाबाद के रहने वाले मामा सुशील कुमार त्रिपाठी से 08 फरवरी 2026 को डेढ़ बजे दिन में रजत पांडेय से फोन पर बातचीत हुई तो उन्होंने बताया कि बस वाले ने खलीलाबाद में न उतार कर उन्हें नौसढ़ में बस से उतारा। उसके बाद रजत की मोबाइल बंद हो गई और परिजनों का उससे संपर्क टूट गया। परिजन जब उक्त बस वाले से संपर्क किए तो उसने रजत को खलीलाबाद में बस से उतारने‌ की जानकारी दी। पीड़ित परिजनों ने कोतवाली खलीलाबाद में रेडियोग्राफर के लापता होने के संबंध में गुमशुदगी दर्ज कराई। एसपी संदीप मीना ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सर्विलांस टीम और कोतवाली पुलिस को लापता युवक को ढूंढ़ने के लिए लगाया। पुलिस विभिन्न सोशल मीडिया वेबसाइट के माध्यम से प्रचार प्रसार कराया एवं तलाश किया गया। सर्विलांस सेल की टीम इलेक्ट्रानिक सर्विलांस के माध्यम से गुमशुदा का लोकेशन ट्रेस किया। उसके बाद पुलिस टीम में शामिल एसआई अरविंद मौर्या, कांस्टेबल सत्येंद्र कुमार यादव, कांस्टेबल अरूण कुमार मुम्बई के लिए रवाना हुए। पुलिस टीम को लापता रेडियोग्राफर नरीमन प्वाइंट मुम्बई में मिले। कोतवाल जय प्रकाश दूबे के मुताबिक पूछताछ में गुमशुदा रजत पांडेय ने बताया कि वह दिल्ली में रहकर रेडियोग्राफर का काम करते थे। वह प्राइवेट नौकरी के साथ -साथ कई वर्षों से पैरा मेडिकल क्षेत्र में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे थे,लेकिन सरकारी नौकरी हासिल करने में सफलता नही मिलने एवं आर्थिक तंगी की वजह से वह काफी परेशान थे। 07 फरवरी 2026 को वह दिल्ली से प्राईवेट बस से अपने मामा के घर सेमरा (मगहर) के लिए निकले थे। 08 फरवरी 2026 को दिन में करीब 01 बजे उसे खलीलाबाद उतरना था, लेकिन वह परेशान थे, इसलिए खलीलाबाद न उतरकर वह गोरखपुर के नौसड़ तिराहे पर उतरे और घरवालों को फोन से बताया कि बस चालक ने उसे जबरदस्ती गोरखपुर में उतार दिया है । फिर वह अपना मोबाइल नौसड़ में ही बन्द करके सरकारी बस से रेलवे स्टेशन गोरखपुर पहुंचे और वहां से ट्रेन पकड़कर वाराणसी चले गए । बनारस में चार दिन रहे। उसके बाद वहां से ट्रेन पकड़कर उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश में करीब डेढ़ महीने रहे। उस दौरान ऋषिकेश में शिवशक्ति नामक हास्टल में वह 18 हजार रूपये पगार पर डेढ़ महीने प्रॉपर्टी मैनेजर की नौकरी भी किए। 05 अप्रैल 2026 को उत्तराखंड से गोवा चले गए। गोवा से घूमते हुए वह मुंबई के गेटवे ऑफ इण्डिया, नरीमन प्वाईंट भी गए । नरीमन प्वाइंट पर समुद्र के किनारे वह अकेले बैठे थे, तभी पुलिस की टीम उसके पास आयी और उसे वापस ले आयी। कोतवाल ने बताया कि रेडियोग्राफर रजत पांडेय को उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया।

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