Hindi NewsUttar-pradesh NewsSantkabir-nagar NewsPoor Conditions at Rain Shelters in Sant Kabir Nagar No Basic Amenities for Travelers
रैन बसेरा में बदहाल हैं सुविधाएं, मजबूरी में गुजारते हैं रात

रैन बसेरा में बदहाल हैं सुविधाएं, मजबूरी में गुजारते हैं रात

संक्षेप:

Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर में रैन बसेरों की स्थिति बेहद खराब है। बंजिरया स्थित रैन बसेरा में स्नानागार की व्यवस्था नहीं है और खिड़कियां टूटी हुई हैं। ठंड से बचाव के लिए अलाव की व्यवस्था है, लेकिन गीली लकड़ियों के कारण इसका उपयोग कठिन है। स्थानीय अधिकारी भी स्थिति को सुधारने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

Jan 07, 2026 11:07 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
share Share
Follow Us on

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में रैन बसेरा के अव्यवस्थाओं का नजारा देखना है तो नगरपालिका के बंजरिया स्थित रैन बसेरा में चले आइए। यहां पर स्नानागार पूरी तरह से डैमेज है। महिला हो या फिर पुरुष यहां पर स्नान करना तो दूर पानी तक का मुकम्मल इंतजाम नहीं है। खिड़कियां टूटी हुई हैं। बंजिरया स्थित रैन बसेरा में जो एक बार रात रुक जाता है वह दोबारा यहां रात रुकने के लिए सोचता तक नहीं है। रैन बसेरा में भोजन की व्यवस्था नहीं है। ठंड से बचाव के लिए न रूम हीटर है न ब्लोअर की सुविधाएं हैं। ठंड से बचाव का सहारा अलाव ही है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इसमें भी इन दिनों आ रही लकड़ियां गीली हैं। जिले में रैन बसेरा का इंतजाम ना काफी है। सबसे अधिक खराब दशा बंजरिया स्थित नगरपालिका के रैन बसेरा की है। इस रैन बसेरा की खिड़की टूटी हुई हैं। रात हवाओं का झोका रैन बसेरे में इस प्रकार से घुसता है कि जैस लोगों की हड्डियों में नस्तर चुभ रहा है। फर्स टूटा हुआ है। इस कड़ाके की सर्दी में भी खिड़कियों का मरम्मत नहीं हो सका है। कक्ष के अंदर दस बेड बने हुए हैं। इसमें रजाई और गद्दा लगा हुआ है। कड़ाके की सर्दी में यह ना काफी साबित हो रहा है। रूम को गर्म करने के लिए न तो यहां पर ब्लोअर चल रहा है और न ही रूम हीटर चलाया जा रहा है। स्नानागार में गीजर की सुविधा नहीं है। यहां के स्नानागार में स्नान नहीं किया जा सकता है। बगल में नगरपालिका का सुलभ शौचालय है। लोग इसी शौचालय का प्रयोग करते हैं। ठँडक बढ़ने के बाद भी किसी भी दिन रैन बसेरा में फुल नहीं हुआ है। पिछले एक माह में 25 व्यक्त ही यहां पर रात्रि विश्राम किए हैं। रैन बसेरा के ऊपरी तल पर जाने वाले रास्ते पर साइिकल व अन्य समान रखा हुआ है। ऊपर का कक्ष पूरी तरह से बंद पड़ा है। ईओ नगरपालिका अवधेश कुमार भारती का कहना है कि रैन बसेरा के संचालन के लिए चार कर्मचारियों को तैनात किया गया है। अलाव की मुकम्मल व्यवस्था है। स्नान के लिए पालिका का ही सुलभ शौचालय मौजूद है। ------------------------------------------ एमसीएच विंग्स में बनाया गया अस्थाई रैन बसेरा जिला अस्पताल में रैन बसेरा अभी पूरी तरह से चलन में नहीं है। काम अधूरा होने की वजह से अभी इसमें रहने लायक नहीं है। मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने की वजह से जिला अस्पताल के एमसीएच विंग्स में अस्थाई रूप से वार्ड को रैन बसेरा घोषित कर दिया गया है। जिला अस्पताल के सीएमएस डा. राम प्रवेश ने बताया कि अस्पताल के पास अभी रैन बसेरा नहीं है। वार्ड को ही रैन बसेरा बना दिया गा है। बेड सीट और कंबल लगा हुआ। तीमारदारों के आने पर हीटर लगा दिया जाता है। ------------------------------------------ 50 बेड के शेल्टर हाउस में सिर्फ गीजर की है सुविधा रेलवे स्टेशन के निकट 50 बेड का शेल्टर हाउस बना हुआ है। यहां पर विस्तर और कंबल मौजूद है। मरीजों की सुविधा के लिए बाथरूम में एक गीजर लगा हुआ है। बंजरिया रैन बसेरा की अपेक्षा यहां पर यात्री आधिक आते हैं। रूम हीटर व ब्लोअर की सुविधा नहीं है। ठंड से बचाव के लिए शेल्टर हाउस के बाहर अलाव की सुविधा है। लेकिन गीली लकड़ियों के कारण जलने में दिक्कत हो रही है। --------------------------------------------------- रैन बसेरा बना शोपीस, तीन साल में एक भी मुसाफिर नहीं पहुंचा बेलहर नगर पंचायत का गठन हुए लगभग तीन वर्ष बीतने को हैं। नगर पंचायत क्षेत्र में यात्रियों के ठहरने के उद्देश्य से रैन बसेरा का निर्माण कराया गया था। पड़ताल के दौरान सामने आया कि बेलहर नगर पंचायत में बने रैन बसेरे में आज तक एक भी मुसाफिर ने रात नहीं बिताई। रैन बसेरे के अंदर पांच बेड जरूर लगे हुए मिले, लेकिन वहां न तो कोई ठहरने वाला दिखा और न ही उपयोग के कोई संकेत नजर आए। रैन बसेरा पूरी तरह से खाली पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए रैन बसेरे का कोई लाभ आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। नगर पंचायत में तैनात अधिशासी अधिकारी (ईओ) अमित कुमार सिंह ने बताया कि क्षेत्र ग्रामीण प्रकृति का है। नगर पंचायत बनने के बाद से अब तक यहां बाहर से आने वाले मुसाफिरों की संख्या न के बराबर रही है, इसी कारण रैन बसेरे का उपयोग नहीं हो पा रहा है। --------------------------- एक-दो मुसाफिरों ने बिताई है रात हैंसर बाजार-धनघटा नगर पंचायत क्षेत्र के बाण्डा बाजार स्थित रैन बसेरे के सामने अलाव जलता मिला, जिसकी देखरेख व निगरानी की जिम्मेदारी मकसूद खान संभाल रहे थे। वे अलाव के पास ठंड से बचाव करते हुए पाए गए। पुरुषों एवं महिलाओं के लिए अलग-अलग कमरे बनाए गए हैं। पुरुषों के कमरे में पांच चारपाई तथा महिलाओं के कमरे में दो चारपाई रखी गई हैं, जिन पर गद्दा व कंबल की व्यवस्था पाई गई। रैन बसेरे में कोई भी मुसाफिर मौजूद नहीं था। रैन बसेरे में रूम हीटर, ब्लोअर तथा गीजर जैसी सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। ठंड से बचाव के लिए गद्दा-कंबल के साथ रैन बसेरे के सामने नियमित रूप से अलाव जलाया जा रहा है। देखरेखकर्ता मकसूद खान ने बताया कि अब तक एक-दो मुसाफिरों ने ही रात गुजारी है। नगर पंचायत हैंसर बाजार-धनघटा की अध्यक्ष रिंकू मणी ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद रैन बसेरे में यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। ठंड के मौसम को देखते हुए अलाव, गद्दा और कंबल की व्यवस्था की गई है। रैन बसेरे की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए नगर पंचायत द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।