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अस्पताल में हृदय रोगियों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं

अस्पताल में हृदय रोगियों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं

संक्षेप:

Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले में हृदय रोगियों के लिए उपचार की उचित व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। कार्डियोलॉजिस्ट का पद नहीं होने से मरीजों का सही...

Sun, 5 Oct 2025 10:44 AMNewswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
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संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले को अस्तित्व में आए ढाई दशक से अधिक का समय हो गया है, लेकिन जिले में हृदय रोगियों के इलाज की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। जिला अस्पताल में जो मरीज आते हैं, उनका प्राथमिक इलाज से अधिक कुछ नहीं किया जाता है। हृदयाघात के मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। जिले की आबादी लगभग 25 करोड़ हो गई है। इतनी बड़ी आबादी के इलाज के लिए जिला चिकित्सालय तो स्थापित कर दिया गया है, लेकिन इस चिकित्सालय में अभी तक कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं है। चिकित्सक का पद सृजित नहीं होने की वजह से वार्ड तक का भी निर्माण नहीं किया गया है।

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जहां पर व्यवस्था होती वहां हृदय रोगियों को जिस वार्ड में भर्ती किया जाता है, उस वार्ड के बेड में पल्स आक्सीमीटर, ईसीजी मशीन तक की सुविधा होती है। उस वार्ड के लिए अलग से प्रशिक्षित स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय तक नियुक्त किए जाते हैं। लेकिन यहां कोई व्यवस्था नहीं है। जिले में कोई व्यवस्था न होने से किसी को हृदयाघात होता है तो उसको वार्ड में भर्ती नहीं किया जाता है। महज इमरजेंसी में ही प्राथमिक उपचार के बाद ही बीआरडी मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता है। दोनो जिलों के बीच की दी दूरी लगभग 40 किमी पड़ जाती है। इस दौरान मरीज की हालत और भी बिगड़ जाती है। मरीज का समय पर इलाज होता तो उसकी जान बचाने में आसानी होती। वैसे जिला अस्पताल में हृदय रोगियों के इलाज की जिम्मेदारी फिजीशियन पर है। वह अपने स्तर से जितना संभव है उतना ही इलाज करते हैं। जिला अस्पताल मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. राम प्रवेश ने कहा कि अस्पताल में शासन से कार्डियोलाजिस्ट का पद सृजित नहीं है। इसकी वजह से तैनाती भी नहीं हो पा रही है। अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट का पद सृजित करने के लिए शासन में पत्र लिखा गया है। पद सृजित होने के बाद ही मरीजों का मुकम्मल इलाज हो पाएगा।