
प्राथमिक विद्यालय व स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाओं से वंचित है उपधी
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले के उपधी गांव में विकास की योजनाओं के बावजूद ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव में शिक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएं और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, जबकि पंचायत सचिवालय से भी कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के गांवों के विकास के लिए शासन की ओर से अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं। शिक्षा-स्वास्थ्य के साथ शुद्ध पेयजल, गांव को साफ-सुथरा रखने व पंचायत सचिवालय से लोगों का जन सुविधा देने के लिए हर उपाय किया जा रहा है। वहीं इसके विपरीत सेमरियावां ब्लॉक गांवों में समस्याओं का अंबार लगा है। ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। ब्लाक क्षेत्र का उपधी गांव भी समस्याओं के मकड़जाल से जूझ रहा है। उपधी गांव की सड़कें बदहाल हो गई हैं। गांव में नौनिहालों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य के सुविधाएं नदारद हैं।

यहां सफाई व्यवस्था काफी खराब है। गांव में जगह-जगह गंदगी का अम्बार लगा हुआ है। ग्रामीणों को पानी पीने के लिए शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। गांव के लोग नारकीय जीवन यापन करने पर मजबूर है। उपधी गांव की आबादी करीब 1500 के पार है। 2015 के पहले तक यह गांव चोरहा ग्राम पंचायत में जुड़ा था। चोरहा में सम्मिलित होने के कारण उपधी गांव का समुचित विकास नहीं हो पाया। आबादी ज्यादा होने पर अलग हुआ। 2015 के पहले गांव में सभी सड़कें कच्ची थीं। ग्रामीणों का जीवन नारकीय हो गया था। मगर 2015 के परसीमन के बाद उपधि को ग्राम पंचायत का दर्जा मिला। ग्राम पंचायत का दर्जा मिलने के बाद गांव का कुछ काम हुआ। पर अभी भी गांव में कई मूलभूत सुविधाएं ग्रामीणों को नहीं मिल पाई हैं। बच्चों की शिक्षा के लिए प्राथमिक विद्यालय नहीं हैं। उन्हें पढ़ने के लिए दूसरे गांवों का सहारा लेना पड़ता है। वही बच्चों व गर्भावती महिलाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए स्वास्थ्य उपकेन्द्र का निर्माण आज तक नहीं हो पाया है। स्वास्थ्य देखभाल के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। शुद्ध पेयजल के लिए गांव में कोई सुविधा नहीं है। इंडिया मार्का हैंड पंप खराब हैं। लोग देशी नल के पानी का प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों को आज भी नारकीय जीवन यापन करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। नौनिहालों के कुपोषण से बचाव के आंगनबाड़ी केंद्र तक नसीब नहीं हो पाया है। गांव में नहीं है प्राथमिक विद्यालय सरकार ने 14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का प्राविधान किया है। इसके लिए तमाम अभियान चलाए जाते हैं। अभियान चलाकर बच्चों का दाखिला कराया जाता है। पर यह एक गांव ऐसा है जहां अब तक बच्चों की प्राथमिक शिक्षा के लिए कोई विद्यालय नहीं बना है। इस गांव प्राथमिक स्तर की शिक्षा लेने वाले 6 से 14 वर्ष के करीब 70 से अधिक बच्चे होंगे। मगर विद्यालय दूर होने से यह बच्चे या तो शिक्षा से वंचित रह जा रहे हैं या फिर दूर दराज शिक्षा लेने के लिए जाने पर मजबूर हैं। ऐसे में अभिभावक छोटे बच्चों को दूर के स्कूल भेजने में कतराते हैं। गांव में नही है कोई स्वास्थ्य सुविधा सरकार की तरफ से सदूर क्षेत्र के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए शासन स्तर से हर उपाय किया जा रहा है। गांव-गांव में स्वास्थ्य उपकेन्द्र की निर्माण कराकर बच्चों व महिलाओं को अच्छी सुविधा दिया जा रही है। मगर इस गांव में आज भी कोई स्वास्थ्य उपकेन्द्र का निर्माण नहीं हो पाया है। अस्पताल व मातृ शिशु कल्याण केन्द्र न होने से बच्चों व महिलाओं को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। समय से टीकाकरण के साथ गर्भावती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण नहीं हो रहा है। सचिवालय से नहीं मिल रहा लाभ गांव में लाखों रुपया खर्च कर पंचायत सचिवालय का निर्माण किया गया है। पंचायत सचिवालय पर एक कर्मचारी की तैनाती भी किया गया है। इसका उद्देश्य है कि गांव के ग्रामीणों को अपनी कार्यों को कराने के लिए भटकना न पड़े। पर लोगों को सारे संसाधन के बावजूद सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। अक्सर बंद रहने से ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिला पाता है। आज भी यहां के ग्रामीणों को अपने परिवार रजिस्टर व अन्य अभिलेख के कागजात प्राप्त करने के लिए गांव से 15 किलोमीटर दूर ब्लाक मुख्यालय पर जाना पड़ रहा है। धन खर्च के साथ समय की बर्बादी होती है। सरकार के लाखों रुपए खर्च करने का अर्थ नहीं निकल पा रहा है।

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