बदहाली के भंवर से उबर नहीं पाया समय माता मंदिर पोखरा
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद शहर का समय माता मंदिर पोखरा लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद बदहाल है। यहां न दुकाने बनीं, न पर्यटक आए। पोखरे में जलकुंभी भरी हुई है और नगरपालिका का ध्यान नहीं। प्रशासन ने कई योजनाएं बनाई, लेकिन सभी फाइलों में ही रहीं। अब एक करोड़ रुपये का पुनरीक्षित बजट भेजा गया है।
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद शहर के समय माता मंदिर पोखरे के सुंदरीकरण के नाम पर लाखों रुपया खर्च हो गया, लेकिन पोखरे की हालत नहीं सुधरी। पोखरा अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यहां पर न तो दुकानें बन सकी और न ही पर्यटक आ रहे हैं। पोखरे के आस पास ईंट, गिट्टी बिखरी हुई है। एक्का-दुक्का बच्चे खेलने के लिए आ जाते हैं। समूचा तालाब जलकुंभी से पटा हुआ है। नगरपालिका भी अब ध्यान नहीं दे रही है। लाखों रुपया खर्च होने के बाद पोखरे की हालत सुधरी नहीं। शहर के मध्य समय माता मंदिर का पोखरा मौजूद है।
पास में समय माता का मंदिर होने की वजह से इस पोखरे का महत्व और बढ़ जाता है। तीन साल पूर्व जिला प्रशासन ने सौंदर्यीकरण कार्यों के लिए पोखरे के पास से सुलभ शौचालय और डूडा कार्यालय को हटवा दिया। धोबी घाट को भी यहां से विस्थापित करा दिया गया। इस पोखरे की बदहाली यह थी कि शहर के लोगों के घरों से निकलने वाला मल मूत्र भी इसी पोखरे में गिराया जाता था। इसकी दशा सुधारने के लिए प्रशासन के सख्त रुख के बाद लोगों के घरों से निकलने वाले गन्दे पानी को रोक दिया गया। तब माना जा रहा था कि जल्द ही पोखरे का कायाकल्प हो जाएगा। अब तक पोखरे के सुंदरीकरण के नाम पर 50 लाख रुपया खर्च हो गया है। लेकिन प्रगति के नाम पर अब तक महज पोखरे के दक्षिण की ओर से दिवार खड़ी हुई हैं। पोखरा और आबादी के बीच में नाला का निर्माण कराया गया है। पूर्व की ओर भी सीढ़ी, दीवार और नाला का काम हो सका है। दुकाने बनाने व पालीथिन मुक्त करने की थी योजना कार्ययोजना के तहत पोखरे के उत्तर की ओर से दुकानों का निर्माण के साथ स्वयं सेवी संगठनों के दुकानों का आवंटन किया जाना था। इस परिसर में पालीथिन मुक्त करने की योजना थी। पर्यटकों को लुभाने के लिए तालाब के अंदर फौव्वारा लगाने के साथ बोटिंग की व्यवथा की जानी थी। ताकि अधिक से अधिक लोग पर्यटन के लिए यहां पर आ सकें। यह सब कुछ फाइलों में उलझ कर रह गया। वर्तमान में तालाब में जलकुंभी इस कदर भरी पड़ी है जैसे यहां पर कोई काम ही नहीं हुआ है। न तो तालाब के किनारे दुकान बनी और न ही फौव्वारा बन सका है। टूट गईं इंटरलाकिंग ईंटें समय माता मंदिर के पीछे व पोखरे के बीच के परिसर में इंटरलाकिंग ईंटों से सड़कें बनवाई गई थीं। पोखरे के निर्माण के दौरान भारी वाहनों के आने जाने से ये इंटे टूट गई हैं। इन पर गड्ढे बन गए हैं। इनसे गुजरते समय हिचकोले खाना पड़ता है। ईओ नगरपालिका अवधेश कुमार भारती ने कहा कि तालाब के सुंदरीकरण के लिए शासन में एक करोड़ से अधिक धनराशि का रिवाइज स्टीमेट तैयार का भेजा गया है। शासन से धन अवमुक्त होते ही तालाब के सुंदरीकारण का काम शुरू हो जाएगा। जल्द ही पोखरे को नया लुक प्रदान कर दिया जाएगा।
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