गिराया गया ब्रिटिश काल में बना जूनियर हाईस्कूल सेमरियावां का भवन
संतकबीरनगर के जूनियर हाईस्कूल सेमरियावां में ब्रिटिश काल का जर्जर भवन गिरा दिया गया। 95 वर्षों से शिक्षा का केंद्र रहा यह भवन, कई पीढ़ियों की यादों का गवाह था। पूर्व छात्रों ने अपने जीवन की घटनाओं को साझा किया और भवन के ध्वस्तीकरण पर दुख व्यक्त किया। यह विद्यालय प्रतिभाओं की नर्सरी रहा है।
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के जूनियर हाईस्कूल सेमरियावां में मजदूर ब्रिटिश काल के जर्जर भवन को गिरा दिया गया। उस पर लगे कबेलू (पकी मिट्टी की टाइल) को जब हथौड़े की चोटों से ढहा रहे थे, तब केवल एक भवन नहीं टूट रहा था, बल्कि उसके साथ कई पीढ़ियों की यादें भी मलबे में तब्दील हो रही थीं। वर्ष 1931 में ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक भवन 95 वर्षों तक क्षेत्र में शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा। जर्जर हो चुके इस भवन का अब ध्वस्तीकरण करा दिया गया। 1931 में ब्रिटिश सरकार ने सेमरियवां में बालक एवं बालिका का अलग-अलग विद्यालय भवन का निर्माण कराया था। उस दौर में यह विद्यालय शिक्षा का बड़ा केन्द्र हुआ करता था। सैकड़ों गांव के बच्चे शिक्षा लेते थे। यह भवन हजारों विद्यार्थियों के बचपन के सपनों व संघर्षों का गवाह रहा है। इसी परिसर में बच्चों ने पहली बार ककहरा सीखा, प्रार्थना सभाओं में भाग लिया, खेलकूद किया व जीवन में आगे बढ़ने के सपने संजोए。
विद्यालय की शैक्षिक पहचान
विद्यालय के बरामदों, खिड़कियों व कक्षाओं से न जाने कितनी पीढ़ियों की हंसी, शरारतें व सीख जुड़ी थीं। ग्रामीणों के अनुसार यह भवन क्षेत्र की शैक्षिक पहचान और ऐतिहासिक धरोहर था। समय के साथ इसकी दीवारें कमजोर हो गई थीं। सुरक्षा की दृष्टि से ध्वस्तीकरण जरूरी हो गया था। हालांकि पुरानी इमारत के खत्म होने का दुख है।
पूर्व छात्रों की यादें
यहीं सीखा था पहला ककहराभवन के ध्वस्तीकरण की सूचना मिलते ही कई पूर्व छात्र विद्यालय पहुंच गए। मलबे को दिखते हुए कई लोगों ने अपने जीवन की घटनाएं आपस में चर्चा करने में जुट गए। किसी ने अपनी पहली कक्षा को याद किया तो किसी ने उन शिक्षकों को, जिन्होंने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी थी। टूटती दीवारों को देखकर कई लोगों की आंखें नम हो गईं। पूर्व छात्रों का कहना था कि यह सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि उनके बचपन, दोस्ती और संघर्षों की अनमोल यादों का घर था।
शिक्षा की अलख जगाने वाला संस्थान
एक इमारत नहीं, कई पीढ़ियों की भावनाएं ढहींकरीब 95 वर्षों तक यह विद्यालय भवन क्षेत्र के हजारों परिवारों से जुड़ा रहा। गांव के बुजुर्गों से लेकर वर्तमान पीढ़ी तक, हर किसी की कोई न कोई स्मृति इस भवन से जुड़ी है। किसी ने यहीं से शिक्षा की शुरुआत की तो किसी ने अपने बच्चों को इसी विद्यालय में पढ़ते देखा। भवन के जमींदोज होने के साथ ही क्षेत्र के लोगों ने अपनी शैक्षिक विरासत के एक महत्वपूर्ण अध्याय को विदाई दी।
प्रतिभाओं की नर्सरी
इस विद्यालय ने दिए नामचीन चेहरेजूनियर हाईस्कूल सेमरियावां केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं था, बल्कि प्रतिभाओं की नर्सरी रहा है। इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर अनेक छात्र देश-विदेश में ऊंचे पदों तक पहुंचे। विद्यालय के पूर्व छात्रों में आईएएस अधिकारी अब्दुल खालिक और फुरकान अख्तर, पूर्व विधायक अफसर-उल-अहमद, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष मोहम्मद नाजिम खां, बसपा के पूर्व प्रत्याशी एवं सपा जिलाध्यक्ष मशहूर आलम चौधरी तथा सऊदी अरब की प्रसिद्ध तेल कंपनी साउदी के आरमको में प्रबंधकीय पद पर कार्यरत अजीजुर्रहमान शामिल हैं। इसके अलावा इस विद्यालय ने दर्जनों प्रधानाचार्य, डॉक्टर, इंजीनियर, हजारों शिक्षक, जनप्रतिनिधि और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले व्यक्तित्व दिए हैं। क्षेत्र के लोग इसे प्रतिभाओं को तराशने वाली ऐतिहासिक पाठशाला के रूप में याद करते हैं।
क्षेत्र का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र
25 किलोमीटर दूर से पढ़ने आते थे छात्रजूनियर हाईस्कूल सेमरियावां अपने समय में क्षेत्र का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र था। शिक्षा की बेहतर व्यवस्था होने के कारण आसपास के ही नहीं, बल्कि 20 से 25 किलोमीटर दूर स्थित गांवों से भी छात्र यहां पढ़ने आते थे। उस दौर में आवागमन के सीमित साधनों के बावजूद बच्चे पैदल, साइकिल और बैलगाड़ी से विद्यालय पहुंचते थे। क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के विद्यार्थियों ने इसी विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य की नींव रखी। ग्रामीणों का कहना है कि यह विद्यालय केवल एक स्कूल नहीं, बल्कि पूरे इलाके में शिक्षा की अलख जगाने वाला संस्थान था, जिसने कई पीढ़ियों को शिक्षित कर समाज को नई दिशा दी।
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