अग्निशमन केंद्र अधूरे, कैसे हो हादसों पर नियंत्रण
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले में गर्मी के चलते आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। फायर विभाग के इंतजाम नाकाफी हैं और अग्निशमन केंद्रों का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। इससे फसलें जल रही हैं और लोगों को वित्तीय नुकसान हो रहा है। स्थानीय लोग राहत राशि का इंतजार कर रहे हैं।

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में गर्मी व गर्म हवाओं का प्रकोप बढ़ने के साथ ही आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं। इन घटनाओं को लेकर फायर विभाग के इंतजाम नाकाफी हैं। मेंहदावल और धनघटा में अग्निशमन केंद्र का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। आग लगने पर खलीलबाद, मेंहदावल व धनघटा में तैनात फायर टेंडरों से संबंधित क्षेत्र में आग पर काबू पाने की कोशिश की जाती है। आग लगने की घटनाओं से मुख्यालय की दूरी अधिक होने से जब तक फायर ब्रिगेड पहुंचती है तब तक सब कुछ स्वाहा हो चुका होता है। या फिर ग्रामीण जुटकर आग पर काबू पाते हैं।हर
साल आग लगने की घटनाओं का कहर झेलने वाले इस जिले में इस साल भी आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। तेज हवाएं चल रही हैं। खेतों में गेहूं की फसल पककर लगभग तैयार हो गई हैं। कई क्षेत्रों में मड़ाई-कटाई शुरू हो गई है। प्रति वर्ष ऐसे समय में फसल में आग लगने की दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में अग्निशमन केंद्रों का निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। वहीं जिले में अब तक आग लगने की कई स्थानों पर घटनाएं हो चुकी हैं। पौली, मेंहदावल नाथनगर क्षेत्र में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। इस समय तैयार हो चुकी गेहूं की फसलें आग की चपेट में आ रही हैं। फसल के जलने से लोगों की लागत व पूंजी सब कुछ खत्म हो गया है। इसके साथ ही परिवार का पेट पालने के साथ ही अगले फसल की तैयारी की चिंता बढ़ गई है। लोगों को अब शासन से मिलने वाली राहत राशि का इंतजार है। धनघटा के राम निहोर ने कहा कि आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। पर फायर स्टेशन अब तक नहीं बना। इससे इस साल फिर से लोगों को आग की घटनाओं का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।--------------------लागत भी बढ़ी और समय अवधि भी पर पूरा नहीं हुआ कार्यतत्कालीन प्रदेश सरकार में मंत्री श्रीराम चौहान ने 2019 में धनघटा के सिरसी में अग्निशमन केंद्र भवन निर्माण की आधारशिला रखी थी। शासन स्तर से 7.20 करोड़ रुपये केंद्र निर्माण के लिए स्वीकृत हुए थे। धन अवमुक्त होने के बाद कार्यदायी संस्था आवास विकास परिषद ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया। निर्माण की गति ने रफ्तार पकड़ी। तीन वर्षों के बाद भवन का चालीस प्रतिशत हिस्सा तैयार होने के बाद धन खत्म हो गया तो निर्माण कार्य ठप हो गया। समय गुजरने के साथ भवन में प्रयुक्त होने वाले सामग्रियों की कीमत भी बढ़ गई। ऐसे में भवन निर्माण में निर्धारित लागत में भवन निर्माण पूरा कर पाना असंभव हो गया। दो वर्ष बाद केंद्र के निर्माण के लिए शासन ने दोबारा धन अवमुक्त किया। इस बीच अग्निशमन केंद्र के निर्माण की लागत 10.05 करोड़ रुपये तक स्वीकृत कर दी गई। केंद्र का निर्माण मार्च 2025 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है।-------------------छह वर्ष बीतने के बाद भी नहीं पूरा हो पाया अग्निशमन केंद्र का निर्माणमेंहदावल क्षेत्र के तीन ब्लाकों में आग लगने की घटनाओं से लोगों का प्रतिवर्ष लाखों का नुकसान होता है। इन घटनाओं से तहसील क्षेत्र में होने वाले नुकसान पर अंकुश लगाने के लिए मेंहदावल क़े भरवलिया पाण्डेय में हो रहे अग्निशमन केंद्र का निर्माण छह वर्ष में भी पूरा नहीं हो पाया है। केंद्र का लगभग काम पूरा हो पाया है। पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल की पहल पर भरवलिया पांडेय गांव में लगभग 11 करोड़ की लागत से अग्निशमन केंद्र का निर्माण वर्ष 2020 में शुरू किया गया था। अगले वर्ष गेहूं की फसल तैयार होने से पहले अग्निशमन केंद्र खुल जाने का दावा किया जाता है, जो खोखला साबित हो रहा है। जनपद मुख्यालय से फायर ब्रिगेड क़े पहुंचने से पहले ही आग ठंडी हो जाती है और काफी नुकसान हो जाता है। अज्ञात कारणों से भी आग लगने से अक्सर मकान व दुकान में भी नुकसान होने का मामला सामने आता रहता है।
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