बेसहारा घुमंतू पशुओं से त्रस्त हैं किसान

Jan 11, 2026 01:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
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Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले के मेंहदावल क्षेत्र के किसान कड़ाके की ठंड में भी चैन से नहीं सो पा रहे हैं। आवारा पशुओं का आतंक उनकी फसल को बर्बाद कर रहा है, जिससे उन्हें रात-रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। किसान प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी फसल और जीवन की रक्षा हो सके।

बेसहारा घुमंतू पशुओं से त्रस्त हैं किसान

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में मेंहदावल क्षेत्र के किसान इन दिनों कड़ाके की ठंड में भी चैन की नींद नहीं सो पा रहे हैं। वजह है बेसहारा व घूमंतू पशुओं का बढ़ता आतंक, जो किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहा है। गेहूं की फसल को बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है, जिससे उनकी जान तक जोखिम में पड़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन शीघ्र ही आवारा पशुओं को पकड़वाने की पहल नहीं करता है तो फसल बचा पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा। खेतों के साथ-साथ सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर पशुओं के जमावड़े से आम लोगों की जान पर भी खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य मार्गों से लेकर गांव की गलियों तक आवारा पशु खुलेआम घूम रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर निष्क्रिय बने हुए हैं। छुट्टा पशुओं का सबसे अधिक असर मेंहदावल पूर्वी कछार क्षेत्र सहित धौरापार, भरवलिया पांडेय, गगनई राव, बाराखाल, कटेला, खर्चा और बहबोलिया के सीवान क्षेत्रों में खेती करने वाले किसानों पर पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि बढ़या गांव में बड़े गो-वंश आश्रय स्थल के निर्माण के बावजूद बेसहारा पशुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आ रही है। किसानों को केवल आवारा पशुओं से ही नहीं, बल्कि नीलगाय के आतंक से भी दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। गेहूं की फसल में जमावट शुरू होने के बाद से ही पशु झुंड के झुंड खेतों में घुसकर फसल बर्बाद कर रहे हैं। इससे किसान लगातार आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं और वे मानसिक रूप से भी टूटते जा रहे हैं। किसान सुखई, छोटे लाल, सहदेव, लालमती, रघु, मनोज, सुखदेव, उदयराज, किशनदेव, चौथी और रामदेव का कहना है कि दिन भर खेतों की रखवाली करने के बाद जैसे ही वे घर लौटते हैं, आवारा पशु खेतों पर धावा बोल देते हैं। सुबह जब किसान खेतों में पहुंचते हैं तो बर्बाद फसल देखकर कलेजा मुंह को आ जाता है। इतना ही नहीं दिन में ये पशु सड़कों पर डेरा जमाए रहते हैं और लोगों को निशाना बनाते रहते हैं। सड़कों पर आवाजाही से हादसे भी लगातार बढ़ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द बेसहारा पशुओं को पकड़कर गो-वंश आश्रय स्थलों में भेजवाया जाए, ताकि उनकी फसल और जीवन दोनों की रक्षा हो सके।

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