
बिजली कर्मियों ने की इलेक्ट्रिसिटी बिल वापस लेने की मांग
संक्षेप: Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले में बिजली कर्मियों ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से मांग की है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि इस बिल के माध्यम से निजीकरण होगा, जिससे बिजली...
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में निजीकरण के विरोध में आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों ने केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मांग की है कि किसान, उपभोक्ता और कर्मचारी विरोधी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 तत्काल वापस लिया जाए। कर्मचारियों ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार देश के संपूर्ण ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण करना चाहती है। निजीकरण के बाद बिजली की दरें इतनी ज्यादा हो जाएंगी कि जो किसानों और आम उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेंडमेंट बिल के सेक्शन 14, 42 और 43 के माध्यम से निजी कंपनियों को यह अधिकार दिया जा रहा है कि वह सरकारी विद्युत वितरण कंपनियों का नेटवर्क इस्तेमाल कर बिजली की आपूर्ति कर सकेंगे और इसके एवज में वे सरकारी बिजली कंपनियों को व्हीलिंग चार्जेज देंगी जो नाम मात्र का होगा।

उन्होंने कहा कि यह सरकारी क्षेत्र में विद्युत वितरण के अंत की शुरुआत होगी। नेटवर्क के मेंटेनेंस और उसके सुदृढ़ीकरण की सारी जिम्मेदारी सरकारी वितरण कंपनियों की होगी। इसका वित्तीय भार सरकारी विद्युत वितरण निगमों पर आएगा। निजी कंपनियों को इस नेटवर्क के जरिए पैसा कमाने की छूट दी जा रही है। इस अमेंडमेंट बिल में निजी कंपनियों को यूनिवर्सल पावर सप्लाई का दायित्व नहीं होगा जिसका दुष्परिणाम यह होगा कि निजी कंपनियां सरकारी कंपनी का नेटवर्क प्रयोग करके मुनाफे वाले औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बिजली देंगी और घाटे वाले किसान और गरीब घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली देने का दायित्व सरकारी विद्युत वितरण निगम का होगा। परिणाम स्वरूप सरकारी विद्युत वितरण कंपनियां कंगाल हो जाएंगी और उनके पास बिजली खरीदने और अपने कर्मचारियों को वेतन देने का भी पैसा नहीं बचेगा। अमेंडमेंट बिल में संशोधन कर अगले पांच वर्ष में क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने की बात लिखी है। इसके साथ ही बिल में यह प्रावधान किया गया है कि बिजली का टैरिफ कॉस्ट रिफ्लेक्टिव होना चाहिए जिसका तात्पर्य है कि लागत से कम मूल्य पर किसी उपभोक्ता को बिजली न दी जाए। इसका मतलब यह हुआ कि किसानों को 05 हॉर्स पावर के पंप के लिए कम से कम 12000 रु प्रति माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा। इसी प्रकार गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें कम से कम 08 रु से 10 रु प्रति यूनिट हो जाएंगी।

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