जल संरक्षण के लिए सिंचाई की ड्रिप पद्धति लाभकारी
संतकबीरनगर में ड्रिप एरिगेशन से किसानों को कम पानी में अधिक उपज मिल रही है। इससे भू-गर्भ जल संरक्षित हो रहा है। नंदलाल सिंह जैसे किसान इस तकनीक से फल और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। उद्यान विभाग 90% अनुदान पर उपकरण मुहैया करा रहा है।

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जनपद में आम, अमरूद, लीची, केला, पपीता, करौंदा के अलावा लता वाली सब्जियों की खेती में ड्रिप एरिगेशन बेहद लाभकारी होगी। कम पानी में अधिकतम सिंचाई होने की सुविधा मिलेगी। और तो और फसलों की संचाई के साथ साथ दवाएं भी आसानी से पौधों की जड़ तक उपलब्ध हो जाएंगी। इससे किसानों को कम पानी में अधिक उपज हासिल होगी और भू-गर्भ जल भी संरक्षित होगा। जिले में दो दर्जन से अधिक किसान ड्रिप एरिगेशन के माध्यम से फल और सब्जियों की खेती कर रहे हैं। गजपुर के नंदलाल सिंह स्थानीय किसानों के प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। वर्तमान में वह करेला, तरोई, नेनुआ, खीरा और परवल की खेती कर रहे हैं। बूंद-बूंद विधि से सिंचाई होने की वजह से महज कुछ ही देर में एक एकड़ खेत की सिंचाई हो जाती है। पौधों की जड़ में जरूरत भर पानी मिल जाता है ऐसे में समूचे खेत की सिंचाई भी नहीं करनी पड़ती है। एक हेक्टेयर खेत से हर साल पांच से सात लाख रुपया नंदलाल सिंह निकाल रहे हैं। आसपास के किसान भी उनसे खेती का हुनर सीख रहे और दूर दराज के किसान भी खेती देखने के लिए आते हैं。
विभाग से मिल रहा 90 प्रतिशत अनुदान
उद्यान विभाग से किसानों को 90 फीसदी अनुदान पर ड्रिप एरिगेशन के लिए उपकरण मुहैया कराया जा रहा है। एक एकड़ खेत के लिए लगभग एक लाख 45 हजार लागत आएगी और किसानों को कृषक अंश के तौर पर दस प्रतिशत ही देय होगा। शेष धन राशि सरकार की ओर से अनुदान के रूप में किसानों को उलब्ध करा दिया जाएगा।
भू-गर्भ जल का संरक्षण
जिला उद्यान अधिकारी समुद्र गुप्त मल्ल ने कहा कि ड्रिप प्रणाली से सिंचाई करने से भू-गर्भ जल का कम प्रयोग होता है। फसलों को उतना ही पानी दिया जाता है, जितनी पौधों को जरूरत होती है। अब नई मशीन भी आ रही है। इससे पौधों की जड़ों को आसानी से दवा और खाद भी उपलब्ध हो जाती है।
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