
भैंसही गांव में विकास नहीं, बदहाल हैं जन सुविधाएं
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर के भैंसही गांव में विकास योजनाओं में बाधा आई है। पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय का निर्माण कोर्ट में फंस गया है, जिससे ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। साफ-सफाई व्यवस्था भी दयनीय है, और पेयजल योजना अधूरी है। गांव के लोग सरकारी दफ्तरों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के नाथनगर ब्लाक के भैंसही उर्फ भैंसवरिया में विकास योजनाएं तो संचालित हो रही हैं, लेकिन कुछ कार्यों में गांव के कुछ लोगों के हस्ताक्षेप करने से मामला कोर्ट तक पहुंच गया। जिसके कारण विकास कार्य अधर में लटक गए हैं। यहां की सुविधाएं बदहाली का शिकार हैं। गांव में जाने वाली सड़क उखड़कर बदहाल हो गई है। सड़क पर बिखरी गिट्टियों से आवागमन करना मुश्किल होता है। पंचायत भवन अधूरा पड़ा है। इसके चलते सरकारी योजना के संचालन में बाधा आ रही है। जरूरी कामों के लिए ग्रामीण ब्लाक और तहसील का चक्कर लगाते हैं।

सामुदायिक शौचालय बदहाली का शिकार बना है। इसमें ताला पड़ा हुआ है। उपयोग में नहीं आ रहा है। गांव सफाई व्यवस्था दयनीय बनी हुई है। सफाई कर्मियों द्वारा मनमानी की जा रही है। इनके लापरवाही बरतने से गांव में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। सफाई व्यवस्था ठीक नही है। गांव के अंदर के रास्तों को ठीक करने के लिए पूर्व में इंटरलॉकिंग सड़क बनाई गई थी। इन सड़कों की ईंटें उखड़ने से कुछ जगह सड़क क्षतिग्रस्त हो चुकी है। बरसात के समय जल जमाव हो जाता है। गांव के तमाम ग्रामीण पेंशन योजना से अछूते हैं। ये लोग अपने पेंशन के लिए ब्लाक से लेकर जिला स्तर तक के ऑफिस का चक्कर लगाते लगाते थक चुके हैं। उनकी समस्या कोई सुनने वाला नहीं है। गांव में कुछ लोग एसआइआर से अछूते हैं। कुछ मतदाताओं को गणना प्रपत्र नहीं मिल पाया है। लोग परेशान हैं। कोर्ट में मामला पहुंचा तो रुक गया पंचायत भवन का निर्माण कार्य क्षेत्र के भैंसही उर्फ भैसवरिया में विगत डेढ़ महीने से निर्माणाधीन पँचायत भवन कोर्ट के आदेश के बाद पूरी तरह रुक गया है। यही हालत निकट ही बन रहे सामुदायिक शौचालय भवन की भी हो गई। अब वह भवन झाड़ झखाड़ में तब्दील होने की कगार पर आ गया है। गांव में डेढ़ साल पहले जब पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य शुरु हुआ तो ग्रामीणों में इस बात की खुशी हुई कि उन्हें बढ़िया व्यवस्था मिलने जा रही है। इसी दौरान गांव के कुछ लोगों ने अड़ंगा खड़ा कर दिया। निर्माणधीन स्थल की भूमि को अपनी भूमि बताकर निर्माण कार्य को रुकवा दिया। मामला समाधान दिवस से लेकर जिलाधिकारी तक पहुंचा। लेकिन निस्तारण की बजाए मामले में पेंच फंस गया। अब मामला सिविल कोर्ट पहुंच गया है। जिसके चलते निर्माण कार्य ठप हो गया। इसके बाद केवल तारीख पर तारीख लगती रही। लेकिन फैसला नहीं हो सका। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के चलते जिम्मेदार विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो गया। गांव में पंचायत भवन नहीं बनने से लोगों को बड़ी समस्या झेलनी पड़ रही है। वहीं सामुदायिक शौचालय का भी प्रयोग ग्रामीण नहीं कर पा रहे है। गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव झेल रहे ग्रामीणों का कोई पुरसा हाल नहीं है पेयजल योजना केवल बोरिंग तक हुई सीमित नाथनगर ब्लाक के भैंसही उर्फ भैसवरिया में छह माह पहले जलमिशन योजना शुरू की गई। योजना के तहत बोरिंग कर दी गई है। अभी तक टंकी बनाने का कार्य शुरू नहीं हो सका। विभाग के जिम्मेदारों से कई बार शिकायत के बाद भी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। पाइप बिछाने के लिए केवल गांव में निर्मित सीसी सड़क को तोड़ा गया है। रास्ते को खराब किया गया है। लेकिन पाइप बिछाने में केवल औपचारिकता बरती गई। जगह जगह पाइप उखड़ गई है। जलनिगम से सम्बंधित कार्यदायी फर्म द्वारा सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। लेकिन जांच तक कराने की अधिकारी जहमत नहीं उठा रहे है मुख्य सड़क पर बड़ी-बड़ी गिट्टी आमजनमानस के लिए सांसत कुशहवा तिराहे से भैंसही उर्फ भैसवरिया गांव को जोड़ते हुए आगे तक जाने वाली सड़क बदहाल हो गई है। इस पर बड़ी-बड़ी गिट्टी बिछाकर लोक निर्माण विभाग ने छोड़ दिया है। यह लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर रही है। उक्त मार्ग से प्रति दिन दर्जनों की संख्या में वाहन लेकर लोग गुजरते हैं। चपेट में आकर चुटहिल हो जा रहे हैं। उक्त सड़क पैदल चलने लायक भी नहीं है। लोगों को काफी समस्या झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने जल्द बनावाने की मांग की है। पुलिया की दीवार टूटकर हुई खतरनाक नाथनगर ब्लाक के भैसही उर्फ भैसवरिया के निकट वर्षों पूर्व पानी निकासी के लिए पुलिया बनाई गई थी। सुरक्षा के लिए दोनों तरफ दीवार बनाई गई थी। लेकिन जर्जर होने से पुलिया की दीवार क्षतिग्रस्त होकर ढह गई है। जिससे हमेशा अनहोनी का भय बना रहता है। दोनों तरफ गहरी खाई के होने की वजह से जोखिम का खतरा अधिक बढ़ गया है। जरा सी लापरवाही होने पर खतरे का साया बना हुआ है। सचिव और लेखपाल नही पहुंचते गांव गांव के अधिकांश ऐसे ग्रामीण है जो आज तक पँचायत सचिव और लेखपाल को पहचानते तक नही है। ग्रामीणों की माने तो आज तक दोनो कर्मचारी गांव में नही पहुंचे। कुशहवा चौराहे से ड्यूटी करके वही से तैनाती मुख्यालय लौट जाते है। जिसके कारण परिवार रजिस्टर भाग एक, जन्म, मृत्यु आदि के लिए ब्लाक का चक्कर लगाना पड़ता है। साफ सफाई व्यवस्था बदहाल गांव की साफ सफाई व्यवस्था बदहाल है। स्वच्छता अभियान के तहत यहां पर सफाई कर्मियों की तैनाती है पर वे कब आते हैं किसी को पता नहीं चलता है। हस्ताक्षर बना कर सफाई की औपचारिकता निभा कर चले जाते हैं। इसके चलते जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा हुआ है। लोग अपनी सुविधा के अनुसार अपने घरों के आस पास ही कूड़े को फेंक देते हैं। गांव में आस पास झाड़ियां उगी हुई हैं। इनकी सफाई न होने से बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है। प्रधान प्रतिनिधि संचित कुमार गुप्ता ने कहा कि हर सरकारी योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन किया गया है। किसी के साथ पक्षपात नहीं हुआ है। गांव के कुछ लोग बेवजह सरकारी भूमि पर बन रहे पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय का कार्य ठप करा दिए हैं। हल्का लेखपाल, कानूनगो द्वारा सरकारी भूमि पुष्टि आख्या लगाने के बाद भी मामला मा. न्यायालय में विचाराधीन है। उम्मीद है कि जल्द ही फैसला ग्राम पंचायत के पक्ष में होगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ सकती है। विधायक गणेश चंद्र चौहान ने कहा पूरे विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। सरकार की सभी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। जहां भी शिकायतें अधिक मिल रही हैं, वहां संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य कराए जा रहे हैं। भैंसही उर्फ भैसवरिया गांव से जुड़ी सभी समस्याओं का भी शीघ्र ही निस्तारण किया जाएगा।

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