असुरक्षित पाए गए भुने चने के दो नमूने
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर जिले में भूने चने के दो नमूनों में ऑरामाइन डाई मिलने की पुष्टि हुई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इसके खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह रंग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और कैंसर का कारण बन सकता है।

संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में भूने चने के दो नमूनों में ऑरामाइन डाई पाए जाने की पुष्टि हुई है। लैब के जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने जिले के दो प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय में मुकदमा दायर करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। शासन के निर्देश पर एक माह पूर्व खाद्य सुरक्षा औषधि प्रशासन ने भुना चना पर प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई की थी। इस दौरान एसएसएमएम एंटरप्राइजेज खलीलाबाद व राजू गुप्त किराना स्टोर खलीलाबाद से चने का एक-एक सैंपल संग्रहित कर जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया था। लैब की जांच रिपोर्ट में दोनों भुना चना के नमूने असुरक्षित आए हैं।
इसमें ऑरामाइन डाई पाया गया है। यह एक सिंथेटिक, चमकदार पीला रंग है जिसका उपयोग कपड़ा, चमड़ा और कागज उद्योग में होता है, लेकिन मिलावट के लिए इसे भुने चने और दालों में भी इस्तेमाल किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और कैंसर का कारण माना जाता है। इसके मिलावट से भुना चना और दाल आकर्षक और चमकीली दिखती है। सहायक आयुक्त खाद्य सतीश कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य के लिए घातक है। लीवर, किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा कैंसर का कारक बनता है। सुगर के मरीज अधिक खाते हैं भुना चना भुना चना में सुगर कम पाया जाता है। यही कारण कि बीमार मरीज और मधुमेह के रोगी इसका उपयोग अधिक करते हैं। मधुमेह के मरीजों को लगता है कि इसके उपयोग से उनका सुगर लेबल मेंटेन हो जाएगा, लेकिन वह नहीं जानते हैं कि अंजाने में वह कैंसर को निमंत्रण दे रहे हैं। यही कारण है शासन के निर्देश पर खाद्य एवं औषधि विभाग ने अभियान चला कर भुने चना का नमूना संकलित किया था।

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