हर महीने लाखों खर्च लेकिन नहीं मिल रही सुविधाएं
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में जनपद के गांवों में लाखों खर्च कर
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले में जनपद के गांवों में लाखों खर्च कर बनाए गए सामुदायिक शौचालय का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ज्यादातर शौचालयों का ताला ही नहीं खुलता है, वहीं कई निर्माण की गुणवत्ता खराब होने के कारण बदहाल हो गए हैं। जबकि इन शौचालयों के क्रियान्वयन पर हर माह 63.81 लाख रुपए व्यय होता है। केयर टेकर को छह हजार रुपये महीने मानदेय दिया जाता है। इसके अलावा तीन हजार रुपए प्रति शौचालय सामान के लिए भुगतान होता है। लेकिन इतना खर्च होने के बावजूद ग्रामीणों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है। कुछ शौचालयों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर पर ताला ही लटका रहता है।
जिले में सामुदायिक शौचालयों की स्थिति
जिले में कुल 730 ग्राम पंचायतें हैं, सभी ग्राम पंचायतों में एक-एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण विभाग ने कराया है। शासन की मंशा थी कि गांव के लोग सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करें ही साथ ही विवाह सहित अन्य आयोजनों में भी इसका उपयोग हो सके। लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। विभागीय आकड़ों के अनुसार 730 में से 709 शौचालय संचालित हैं और 21 शौचालय बंद चल रहे हैं। जिनका जल्द संचालन शुरू हो जाएगा। लेकिन विभाग का यह दावा हवा हवाई साबित हो रहा है। शौचालयों का संचालन केवल कागजों में ही हो रहा है। ज्यादातर शौचालय बंद चल रहे हैं। कभी-कभी इसका ताला खुलता भी है लेकिन वह भी तब ही खुलता है जब ब्लाक अथवा जिले स्तर के अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं।
जर्जर सामुदायिक शौचालय
कुछ दिनों में ही जर्जर हो गया सामुदायिक शौचालय विकास खंड पौली के शनिचरा बाजार में संचालित सामुदायिक शौचालय जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। फर्श व दरवाजे टूटे हैं। साफ-सफाई के अभाव ने इसे उपयोग के लिए अयोग्य बना दिया है। ग्रामीण अब्दुल मजीद, मुराद अली, जुबेर, आरिफ जमाल, फारूक, अबू बकर आदि का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय तो बना, लेकिन मरम्मत व देख-रेख के अभाव में जर्जर हो गया है। खराब होने के कारण हम ग्रामीणों को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से जर्जर सामुदायिक शौचालय मरम्मत कराने कि मांग की है।
सामुदायिक शौचालयों की दुर्दशा
झाड़ियों में बना दिया सामुदायिक शौचालय, निष्प्रयोज्य जिले के सेमरियावां ब्लाक के भेलवासी गांव में सामुदायिक शौचालयों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। शौचालय झाड़ियों से ढंका हुआ है, शौचालय तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। कुछ दिन पहले इसकी दुर्दशा को लेकर गांव के ग्रामीणों ने सचिव से शिकायत करने के बाद किसी तरह अब सुबह शाम तो शौचालय तो खुल रहा है, लेकिन वहां तक रास्ता झाड़ियों से ढंका हुआ है। जाने के लिए रास्ता ढूंढ़ना पड़ता है। किसी तरह वहां तक पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में तो चारों तरफ घुटने तक पानी भरा रहता है।
प्रमुख चौराहे पर सामुदायिक शौचालय
जिले की कई ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जिनके क्षेत्र में कई प्रमुख चौराहे और बाजार भी आते हैं। लेकिन इन बाजारों में भी बने सामुदायिक शौचालय नियमित संचालित नहीं हो रहे हैं। सुबह-शाम यदि खुलते भी हैं तो केवल कोरमपूर्ति के लिए। जबकि कस्बों और बाजारों के शौचालयों का संचालन पूरे दिन होना चाहिए। जिससे बाजार में आने वाले लोग उसका प्रयोग कर सकें। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। लोगों को खुले में शौच जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कस्बों के लोगों ने इसकी शिकायत भी किया लेकिन जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर बिल्कुल नहीं जा रहा है। लोगों की माने तो शौचालयों का नियमित संचालन होना चाहिए। इससे संचालित न होने से सबसे अधिक परेशानी आधी आबादी को होती है।
स्वयं सहायता समूहों की भूमिका
सामुदायिक शौचालयों के संचालन और देखरेख की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों को दी गई है। समूह के खाते में ही केयर टेकर का मानदेय और उसके देख-रेख का धन दिया जाता है। कई जगह समूहों में इसको लेकर विवाद भी है। कई बार समूह की महिलाओं ने उच्चाधिकारियों से शिकायत भी किया है। कई ग्राम पंचायतों में प्रधान द्वारा शौचालय की चाबी न दिए जाने की भी शिकायत उच्चाधिकारियों तक पहुंची है। लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार गम्भीर नहीं हुए।
सामुदायिक शौचालयों से संबंधित सामान्य प्रश्न
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