40 वर्ष की उम्र के बाद कमजोर हो जा रही हड्डियां
40 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों का निर्माण धीमा हो जाता है और क्षय बढ़ता है। इसके कारण हार्मोनल बदलाव, कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, तथा खराब जीवनशैली हैं। महिलाओं में इस समस्या का अधिक प्रभाव देखने को मिलता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही उपचार के लिए चिकित्सकों से परामर्श करना आवश्यक है।

हिन्दुस्तान टीम, संतकबीरनगर। 40 वर्ष की उम्र के बाद शरीर में हड्डियों का प्राकृतिक रूप से निर्माण धीमा हो जाता है और उनका क्षय (क्षरण) अधिक होने लगता है। इसके मुख्य कारणों में हार्मोनल बदलाव, कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी तथा खराब जीवनशैली शामिल हैं, जो हड्डियों को कमजोर और खोखला बना देते हैं। नतीजतन जिला अस्पताल में हड्डियों की बीमारी से पीड़ित मरीजों की तादाद में इजाफा हो रहा है। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की संख्या अधिक होती है। उम्र के साथ हड्डियों के कमजोर होने के मुख्य कारण हार्मोनल परिवर्तन को माना जाता है। 40 के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है।
ये हार्मोन हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा 30-35 वर्ष की आयु तक हड्डियों का घनत्व अधिकतम होता है। इसके बाद शरीर पुरानी हड्डियों को जितनी तेजी से तोड़ता है, उतनी तेजी से नई हड्डियों का निर्माण नहीं कर पाता है। यही नहीं संतुलित भोजन के अभाव में शरीर में कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी होने पर हड्डियां गलने लगती हैं। विटामिन-डी के बिना शरीर भोजन से कैल्शियम को अवशोषित नहीं हो पाता है। शारीरिक रूप से सक्रिय न रहने और व्यायाम न करने से हड्डियों और मांसपेशियों का लचीलापन और मजबूती घटने लगती है। जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. एलसी यादव ने बताया कि अत्यधिक शराब पीना, धूम्रपान करना या लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करना हड्डियों को तेजी से नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि हड्डियों से जुड़ी बीमारी होने पर अपने मन से दवाओं के खाने के बजाए विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज कराएं।


