सौरहा सिहोरवा गांव में मूलभूत सुविधाएं हैं नदारद
Feb 17, 2026 10:16 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, संतकबीरनगर
Santkabir-nagar News - संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के विकास खण्ड सेमरियावां क्षेत्र में सौरहा सिहोरवा गांव
संतकबीरनगर, हिन्दुस्तान टीम। संतकबीरनगर जिले के विकास खण्ड सेमरियावां क्षेत्र में सौरहा सिहोरवा गांव के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सरकारी योजनाओं का ग्रामीणों लाभ नहीं मिल पा रहा है। सौरहा सिहोरवा में मूलभूत सुविधाएं नदारद रहने से ग्रामीण आज भी नारकीय जीवन जीने के लिए विवश हैं। सरकारें आती गईं विकास की धारा कागजों में बहाती गईं, परन्तु धरातल पर स्थिति आज भी बदहाली वाली है। गांव में सुविधाओं का आज भी टोटा नजर आ रहा है।
जनपद के नेशनल हाइवे से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित सौरहा सिहोरवा में न तो पीने को शुद्ध पानी है और न ही अच्छी सड़क की सुविधा। इसके कारण ग्रामीण प्रतिदिन इन समस्याओं से परेशान नजर आ रहे हैं। शुद्ध पेयजल की सुविधा न होने से यहां के ग्रामीण देशी हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं। यहां तक कि गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र न होने से ग्रामीण झोला छाप डॉक्टर से दवा कराने के लिए मजबूर हैं। बेहतर इलाज के लिए मुख्यालय जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें 20 किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ता है।
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा दिक्कत हाईवे तक पहुंचने में होती है। गांव से चार सौ मीटर दूरी का रास्ता जगह-जगह टूटा व गड्ढा युक्त होने के कारण काफी परेशानी होती है। इसके चलते बहुत जरूरत पड़ने पर ही लोग गांव से बाहर निकलते हैं। गांव में सरकारी सुविधाओं से कोसों दूर दिखाई पड़ रही हैं। गांव में विवाह घर न होने से गरीब घर के लोग काफी परेशान होते हैं। कुछ घरों में तो चार पहिया वाहन न पहुंच पाने से लोग विवश होकर शादी समारोह तब आयोजित करते हैं जब खेत में फसल कट जाती है। उस समय शादी की तारीख तय करते हैं, लेकिन उस समय अगर बारिश हो गई तो शादी कार्यक्रम में बारिश होने से ग्रामीण परेशान हो जाते हैं लेकिन उनके पास कोई चारा भी नहीं है। इसलिए मजबूर होकर लोग फसल कटने का इंतजार करते हैं। गांव में सरकारी गोदाम नहीं होने से प्राइवेट मकान में सरकारी गल्ला कोटेदार रखने पर मजबूर हैं। गांव में अधिक घरों के बच्चे पढ़ाई से दूर हैं। गांव में खुले सरकारी स्कूल में जूनियर या प्राइमरी तक ही अपनी शिक्षा ग्रहण कर पा रहे हैं। कालेज न होने से बच्चों को दूर का चक्कर लगाना पड़ता है।
चिकित्सा सेवाओं के लिए परेशान होते हैं ग्रामीण
इस गांव के ग्रामीण चिकित्सा सेवाओं के लिए किसी तरह काम चला रहे हैं। गांव में शहरों की तुलना सरकारी चिकित्सा सेवाओं का बुरा हाल है। गांवों में स्वास्थ्य केंद्र ही नहीं हैं। जबकि कुछ गांवों में हेल्थ सब सेंटर खुले हुए हैं वहां सुविधाएं नहीं हैं। न तो स्टाफ है और न ही दवाइयां हैं। इस स्थिति में ग्रामीण जनता जाए तो जाए कहां। इस गांवों में रहने वाले लोगों के सामने और भी बड़ा संकट है। रात के समय कोई बीमार पड़ जाए तो झोलाछापों के अलावा कोई रास्ता नहीं है। तत्काल में प्राथमिक चिकित्सा के लिए सिर्फ झोलाछापों का सहारा है। गांवों की ज्यादातर आबादी झोलाछापों पर निर्भर होकर रह गई है। यहां सिर्फ लोग बच्चों को पोलियो दवा पिलाने व टीके लगाने के लिए आते हैं। कोरम पूरा करके चले जाते हैं।
गांव में पेयजल योजना से वंचित हैं ग्रामीण
इस गांव में दशकों से शुद्ध पेयजल की समस्या बनी है। पानी की व्यवस्था हो इसके लिए यूपी सरकार द्वारा हर घर नल योजना, जल जीवन मिशन योजना इस समय चलाई जा रही है। इस गांव में ये योजनाएं नहीं हैं। हर व्यक्ति पानी की तलाश में इधर-उधर भटकता है। यही वजह है इस गांव के लोग देशी हैंड पंप से पानी पीने के लिए मजबूर हैं। कुछ घरों के लोग आरओ मशीन लगाकर किसी तरह काम चला रहे है लेकिन अधिकांश घरों के लोग आज भी देशी हैंडपंप से पानी पीने के लिए मजबूर हैं।
गांव में सरकारी इण्टर कॉलेज नहीं होने से बच्चों को असुविधा
सौरहा सिहोरवा गांव में सरकारी इण्टर कॉलेज न होने के कारण कई छात्र-छात्राओं को अपनी पढ़ाई मैट्रिक करने के बाद छोड़नी पड़ती है। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। कई छात्र-छात्राएं कॉलेज के अभाव में दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करते हैं। सामान्य घर के लोग किसी तरह से दूसरे जिले या शहरों में जाकर पढ़ाई कर लेते हैं लेकिन गरीब घर के बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। यही वजह है कि इस गांव में अधिकांश घरों के बच्चे मैट्रिक की या कुछ तो प्राइमरी व जूनियर तक पढ़ाई करके घर की रोजी रोटी चलाने के लिए दूसरे शहरों में जाकर मेहनत मजदूरी करते हैं।
गांव में विवाह घर न होने से गरीब घर के लोग परेशान
सौरहा सिहोरवा गांव में विवाह घर न होना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। विशेषकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार के लोग परेशान हैं। सरकारी स्कूलों में शादियां करने पर रोक के बाद लोगों को महंगे प्राइवेट मैरेज हॉल का सहारा लेना पड़ता है, जो उनके बजट से बाहर है। सार्वजनिक स्थान की कमी और खराब सड़कों के कारण भी ग्रामीण शादियों के आयोजन में कठिनाई झेलते हैं। गांवों में शादी विवाह के लिए सार्वजनिक जगह न होना एक बड़ी समस्या बनी है। गांव में सामान्य परिवार के लोग सरकारी स्कूलों में शादी-विवाह कार्यक्रम के आयोजन करते हैं या मैरेज हाल बुक करके शादी का कार्यक्रम कर लेते हैं लेकिन गरीब परिवार के लोग मजबूर होकर खेत में फसल कटने का इंतजार करते हैं फिर शादी करते हैं। अक्सर मई-जून महीने में शादी तय होती हैं। ऐसे लोग डरे रहते हैं कि कहीं बारिश न हो जाए। यह मनाते रहते हैं कि अच्छे से कार्यक्रम हो जाए बारिश न हो।
गांव में सरकारी गोदाम न होने से किराए पर लिया गया मकान
सरकार ने कोटेदारों की दुकान पर सीधे राशन पहुंचाने का निर्देश जारी होने के बाद अब कोटे की दुकानों को भी सरकारी भवन में ही शिफ्ट करने की तैयारी है। अनाज की कालाबाजारी रोकने की दिशा में यह बड़ा कदम है। क्षेत्र के गांवों में अक्सर राशन की कालाबाजारी की शिकायतें मिलती रहती हैं। सौरहा सिहोरवा गांव में अभी तक कोई सरकारी गोदाम नहीं बनने से मजबूर होकर गांव में एक निजी मकान को किराए पर लेकर राशन रखने पर मजबूर हैं।
ग्राम प्रधान फैयाज अहमद काफी प्रयास से गांव में सरकारी सुविधाएं लाई गई हैं। जो भी सुविधाएं गांव के ग्रामीणों को मिलनी चाहिए उसके लिए दिन रात लगे हैं। प्रयास यही है कि गांव के हर एक नागरिक को सरकार की चलाई जा रही योजनाओं का लाभ मिल सके।
विधायक अंकुर राज तिवारी ने कहा सरकार ग्राम पंचायतों के सम्पूर्ण विकास के लिए समर्पित है। सौरहा सिहोरवा गांव में जो भी विकास कार्य अधूरे हैं उसे शीघ्र पूरा कराकर ग्रामीणों की समस्या का समाधान अवश्य कराया जाएगा।

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