Santkabir Nagar News: मासिक कवि गोष्ठी में कवियों ने सुनाई रचनाएं
Santkabir Nagar News: संतकबीरनगर में जन साहित्यिक मंच द्वारा 162 वीं मासिक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि हशमत अज़ीज़ी ने रचना सुनाई, जिसमें कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। कार्यक्रम में कविता के माध्यम से विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डाला गया।

Santkabir Nagar News: संतकबीरनगर, निज संवाददाता। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को गोला बाजार के एक रेस्टोरेंट के हाल में 162 वीं मासिक कवि गोष्ठी/कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं सुनाकर मंत्र मुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि हशमत अज़ीज़ी रहे। उन्होंने ‘सौ बार सही न सही एक बार किया जाए, इस शहर में हम भी हैं हमें प्यार किया जाए’ रचना सुनाई।
विशिष्ट अतिथि की प्रस्तुति
विशिष्ट अतिथि विनय कुमार अज़ीज़ ने ‘आप हैं माता-पिता बच्चों में घुल मिल जाइए, जिंदगी क्या चीज है बच्चों को ये बतलाइए’, सुनाया जिसे सराहा गया। सीएल वर्मा रहबर मेंहदावली ने ‘चले गए हैं ये कहकर कबीर लोगों से के रब्त रखना नहीं बेजमीर लोगों से’ सुनाकर बेजमीर लोगों से दूर रहने की सलाह दी। कवयित्री ज्योति सिंह ‘अहसास’ ने ’तपन हो गलन हो या वर्षा का आलम, सभी को सभी से शिकायत बहुत है’, सुनाकर अपने दिल की व्यथा को बताया। सुरेश यादव जिज्ञासु ने ’दुनिया में सबसे ऊँचा पहचान तिरंगा है, हर हिंदुस्तानी का सम्मान तिरंगा है’, सुनाकर तिरंगे के महत्व को बताया। मुहम्मद अली ने ‘मुझको एहसास कई बार ऐसा होता है, आदमी कुछ भी नहीं यार पैसा होता है’, सुनाकर पैसे के महत्व को बताया। राजेश मृदुल ने ‘इश्क जब हद को पार करता है, बंदिशें दर किनार करता है’, सुनाकर माहौल को रोमांटिक बना दिया।
उस्ताद शायर की सलाह
उस्ताद शायर महज़र खलीलाबादी ने ‘तेरे फरेबे नजर की तबाहियां तौबा, तुझे समझ ले तो फिर आदमी संभल जाए’ सुनाकर फरेबी नजरों से बचने की सलाह दी। वरिष्ठ रचनाकार अवधेश पाण्डेय ने ‘सबकी आँखों नभ में तुम्हें निहारे बादल, पशु पक्षी आदमी उमस से हारे रे बादल’, सुनाकर बादल से बरसने की अपील की। वयोवृद्ध कवि छविराज राज ने ‘सावन की घनघोर घटा लगी, कामिनी सोच विचार रही है, बूँद पड़े तन घाव कर मन यौवन लाख संवार रही है’, सुनाकर सावन के प्रभाव को बताया। राधे श्याम मिश्र ‘श्याम’ ने ‘आपन आन जहां पर होय वहां पर टूटत घर परिवारा, संकट में परिवार फंसे बँट जात तभी घर और दुआरा’, सुनाकर टूटते परिवार की ओर इशारा किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने ‘पाठ पढ़ाया देश को जनता हुई गुलाम, धोखा देना बन गया सदा आप का काम’, सुनाकर नेता जी पर तंज कसा। कार्यक्रम का संचालन कर रहे हामिद खलीलाबादी ने ‘तेरी आँखों में जादू ऐ सनम है, लिया दिल छीन मेरा क्या सितम है’, सुनाकर वाहवाही लूटी। सूरज कुँवर सरस ने ‘राष्ट्रवाद की औंधा पड़ा, पंथ वाद की ठाट...’ सुनाकर राजनीति में आई गिरावट की ओर इशारा किया। इनके अतिरिक्त इस कार्यक्रम में सरदार हरभजन सिंह भजन, राजेंद्र बहादुर सिंह हंस, डा. अवनीश कुमार, जितेंद्र कुमार, आराध्या आदि ने भी काव्य पाठ किया।


