
संभल में 5 हजार किसानों ने छोड़ी रसायन खेती, जैविक विधि से दोगुनी हुई आमदनी
Sambhal News - योगी सरकार ने जैविक खेती को जन-आंदोलन बनाकर किसानों की सेहत और आमदनी बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। संभल में 5000 किसान रासायनिक खेती छोड़कर जैविक पद्धति अपना चुके हैं, जिससे उनकी आमदनी दोगुनी हो गई है। सरकार किसानों को प्रशिक्षण और सब्सिडी भी प्रदान कर रही है।
मिट्टी की सेहत सुधारने और आमजन को गंभीर बीमारियों से बचाने की दिशा में योगी सरकार ने जैविक खेती को जन-आंदोलन का रूप दे दिया है। ‘नमामि गंगे’ एवं ‘प्राकृतिक कृषि योजना’ के अंतर्गत जनपद संभल के लगभग 5000 किसान रसायन-मुक्त खेती से जुड़ चुके हैं। इसका परिणाम यह है कि जिले में 15 से 20 प्रतिशत किसान रासायनिक खेती छोड़कर जैविक पद्धति अपना चुके हैं और उनकी आमदनी में करीब दो गुना तक वृद्धि हुई है। डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सरकार की मंशा के अनुरूप जिले में 20-20 एकड़ के क्लस्टर बनाकर किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इससे न केवल खेती की लागत घटी है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है। अहमदाबाद तक प्रशिक्षण लेने जा रहे किसान किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ब्लॉक से लेकर गांव स्तर तक शिविर आयोजित कर रहा है। प्रधानमंत्री की एग्रीकल्चर कमेटी के कोर मेंबर नितांत सिंह निर्वान और जैविक विशेषज्ञ गोपाल भाई सुथारिया किसानों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। हाल ही में जिले में 1500 किसानों को प्रशिक्षित किया गया, जबकि 25 प्रगतिशील किसानों को विशेष प्रशिक्षण के लिए अहमदाबाद भेजा गया। पद्मश्री से सम्मानित भारत भूषण त्यागी भी समय-समय पर संभल आकर किसानों को जैविक खेती के गुर सिखा रहे हैं। जैविक खेती करने वाले किसानों को सर्टिफिकेट भी दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर पहचान और उचित मूल्य मिल सके। लागत घटी, उत्पाद की कीमत हुई दोगुनी जैविक किसान मोहम्मद फहीम बताते हैं कि रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से जमीन की उर्वरता खत्म हो रही थी। जैविक खेती अपनाने से लागत कम हुई है। हालांकि शुरुआत में उत्पादन थोड़ा कम रहता है, लेकिन बाद में यह रासायनिक खेती से अधिक हो जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि जैविक उत्पाद बाजार में सामान्य उत्पादों की तुलना में दोगुने दाम पर बिक रहे हैं। विभाग की ओर से जीवामृत बनाने के लिए मटका, बाल्टी, गुड़ आदि सामग्री हेतु 1500 रुपये की किट भी उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्ट्रेट में सज रही ‘जैविक हाट’ किसानों को सीधा बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया की पहल पर कलेक्ट्रेट परिसर में ‘जैविक हाट’ लगाया जा रहा है। डीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे चावल, दाल सहित अपनी दैनिक जरूरत का सामान इसी हाट से बाजार मूल्य पर खरीदें, जिससे किसानों का उत्साह बढ़े। इसके अलावा कृषि मेलों और गोष्ठियों के माध्यम से भी जैविक उत्पादों की मार्केटिंग की जा रही है। मशीनों पर 50% तक सब्सिडी, मुफ्त बीज योगी सरकार किसानों को आधुनिक बनाने के लिए कृषि यंत्रों पर 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। जैविक खेती शुरू करने वाले किसानों को निशुल्क बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिकारी गांव-गांव जाकर यह भी देख रहे हैं कि किसान जैविक खाद बना रहे हैं या नहीं और उनकी जरूरतों को समय पर पूरा किया जा रहा है। वर्जन केमिकल पेस्टीसाइड बंद करना हमारी प्राथमिकता है। इससे किसानों की बचत बढ़ रही है और आम जनता को शुद्ध आहार मिल रहा है। - अरुण कुमार त्रिपाठी, डीडी एग्रीकल्चर

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