
दिसंबर की शुरुआत में बदला मौसम का मिजाज, दो से तीन डिग्री बढ़ा तापमान
Sambhal News - दिसंबर की शुरुआत में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है। मौसम में इस बदलाव का असर आम जनजीवन, कृषि और पर्यावरण पर पड़ सकता है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, कृषि अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान तापमान फसलों के लिए नुकसानदायक नहीं है।
संभल। दिसंबर की शुरुआत ने इस बार मौसम के स्वभाव को बदल दिया है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिन के समय लगातार बनी गर्माहट को लेकर यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि कहीं यह जलवायु परिवर्तन का संकेत तो नहीं है। मौसम में इस बदलाव से न केवल आम जनजीवन बल्कि कृषि और पर्यावरण पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 के दिसंबर के पहले सप्ताह में जिले का अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि दिसंबर 2025 की शुरुआत में अधिकतम तापमान 24 से 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 12 से 13 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है।

इस तरह न्यूनतम और अधिकतम दोनों तापमान में दो से तीन डिग्री की वृद्धि साफ तौर पर देखी जा रही है। पिछले वर्ष दिसंबर के इसी सप्ताह में जिले में घना कोहरा छाया रहता था, जिससे वातावरण में नमी और सर्दी का असर अधिक था। यह नमी गेहूं जैसी रबी फसलों की बढ़वार के लिए लाभकारी मानी जाती है। हालांकि इस बार पश्चिमी विक्षोभ का हल्का असर छोड़ दें तो लगातार बनी गर्माहट के कारण कोहरा अभी तक दस्तक नहीं दे सका है। इससे मौसम के प्राकृतिक चक्र में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विशेषज्ञ इसे ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से भी जोड़कर देख रहे हैं, जिसके चलते सामान्य सर्दी पीछे खिसकती नजर आ रही है। जिला आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. अच्युत यादव का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष तापमान का बढ़ना और कोहरे का न आना मौसम में बदलाव का संकेत है। इसका प्रभाव कृषि और पर्यावरण दोनों पर पड़ सकता है, ऐसे में किसानों को सिंचाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वहीं बहजोई में कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में देरी से बदलाव रबी फसलों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि अधिक गर्माहट से मिट्टी की नमी कम होती है और कीट रोगों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि जिले के कृषि अधिकारियों ने फिलहाल किसानों को राहत दी है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी एवं उप कृषि निदेशक अरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान तापमान गेहूं और सरसों की फसलों के लिए नुकसानदायक नहीं है, बल्कि अभी परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि सरसों की फसल के लिए सबसे बड़ा खतरा कोहरा होता है, जो फिलहाल नहीं आ रहा है, इससे सरसों की बढ़वार अच्छी रहेगी। वहीं गेहूं के लिए कोहरा लाभकारी माना जाता है, लेकिन अभी इसकी तत्काल आवश्यकता नहीं है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि फिलहाल सिंचाई पर ध्यान दें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे। यदि हल्की बारिश हो जाती है तो दोनों फसलों को और लाभ मिलेगा। तापमान में मौजूदा बढ़ोतरी से अभी फसलों को कोई नुकसान नहीं है और मौसम फिलहाल गेहूं व सरसों के विकास के लिए उपयुक्त बना हुआ है।

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