मां गंगा को पहला निमंत्रण अर्पित कर शुरू होती हैं विवाह की रस्में
Sambhal News - गुन्नौर क्षेत्र में आज भी कायम है वृद्धों की अनूठी परंपरा क्षेत्र में आज भी विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत आस्था और परंपरा के साथ होती है। यहां

क्षेत्र में आज भी विवाह जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत आस्था और परंपरा के साथ होती है। यहां के ग्रामीण परिवार शादी-विवाह का पहला निमंत्रण गंगा को अर्पित करते हैं। बुजुर्गों की मान्यता है कि मां गंगा को सबसे पहले न्योता देने से घर-परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है और सभी रस्में शांति एवं शुभता के साथ संपन्न होती हैं। ग्रामीण बताते हैं कि विवाह की तिथि तय होने के बाद परिवार के सदस्य गंगा तट पर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। निमंत्रण पत्र, हल्दी, रोली, अक्षत और नारियल अर्पित कर मां गंगा से आशीर्वाद मांगा जाता है। इसके बाद ही घर में अन्य तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू की जाती हैं।
बुजुर्गों के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है। उनका कहना है कि गंगा केवल नदी नहीं, बल्कि आस्था, पवित्रता और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक हैं। इसलिए हर शुभ कार्य की शुरुआत उनके स्मरण से की जाती है। आज आधुनिकता के दौर में भी गुन्नौर क्षेत्र के कई गांवों में यह परंपरा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। युवाओं में भी इस परंपरा को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, जिससे यह सांस्कृतिक धरोहर आज भी जीवित है। ग्रामीणों का मानना है कि मां गंगा को पहला निमंत्रण देने से विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्य बिना किसी विघ्न के संपन्न होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

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