The government s directive in Sambhal has been shelved officers missing from offices public upset - संभल में सरकार के निर्देश को ठेंगा, दफ्तरों से अफसर गायब, जनता परेशान DA Image
13 नबम्बर, 2019|10:28|IST

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संभल में सरकार के निर्देश को ठेंगा, दफ्तरों से अफसर गायब, जनता परेशान

संभल में सरकार के निर्देश को ठेंगा, दफ्तरों से अफसर गायब, जनता परेशान

1 / 4भले ही प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को सुबह नौ बजे से कार्यालय में उपस्थित होकर जनता की समस्याओं का समाधान कराने का निर्देश दिया है पर संभल में इसका पालन होता नहीं दिख रहा। हिन्दुस्तान के रियलिटी चेक...

संभल में सरकार के निर्देश को ठेंगा, दफ्तरों से अफसर गायब, जनता परेशान

2 / 4भले ही प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को सुबह नौ बजे से कार्यालय में उपस्थित होकर जनता की समस्याओं का समाधान कराने का निर्देश दिया है पर संभल में इसका पालन होता नहीं दिख रहा। हिन्दुस्तान के रियलिटी चेक...

संभल में सरकार के निर्देश को ठेंगा, दफ्तरों से अफसर गायब, जनता परेशान

3 / 4भले ही प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को सुबह नौ बजे से कार्यालय में उपस्थित होकर जनता की समस्याओं का समाधान कराने का निर्देश दिया है पर संभल में इसका पालन होता नहीं दिख रहा। हिन्दुस्तान के रियलिटी चेक...

संभल में सरकार के निर्देश को ठेंगा, दफ्तरों से अफसर गायब, जनता परेशान

4 / 4भले ही प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को सुबह नौ बजे से कार्यालय में उपस्थित होकर जनता की समस्याओं का समाधान कराने का निर्देश दिया है पर संभल में इसका पालन होता नहीं दिख रहा। हिन्दुस्तान के रियलिटी चेक...

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भले ही प्रदेश सरकार ने अधिकारियों को सुबह नौ बजे से कार्यालय में उपस्थित होकर जनता की समस्याओं का समाधान कराने का निर्देश दिया है पर संभल में इसका पालन होता नहीं दिख रहा। हिन्दुस्तान के रियलिटी चेक में ऐसा ही कड़वा सच सामने आया। कहीं अधिकारी कार्यालयों से गायब मिले तो कहीं स्टाफ का भी अतापता नहीं था। सरकारी कार्यालय पर ताला लटका होने की तस्वीर सामने आई। कुछ अधिकारी कार्यालय में विभागीय कार्य निपटाते दिखे। सवाल उठा कि ऐसे हालात में भटक रही जनता को कैसे न्याय मिलेगा और कैसे पूरी होगी सरकार की मंशा।

प्रदेश सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है और अधिकारियों को सुबह नौ बजे से ग्यारह बजे तक हर हाल में शिकायतें सुनकर समाधान कराने का निर्देश दिया हुआ है। अधिकारियों के कार्यालयों के बाहर भी लगी प्लेट पर साफ लिखा है कि सरकार द्वारा तय इसी समय में समस्याएं सुनी जाएंगी पर शायद यह केवल दिखावे भर तक ही सीमित है। सोमवार को हिन्दुस्तान के रियलिटी चेक में जो सच्चाई सामने आई उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है। सुबह नौ बजकर चालीस मिनट पर कार्यालय में एसडीएम की कुर्सी खाली मिली तो दफ्तर में बैठे सीओ डा. केके सरोज विभागीय कार्य निपटा रहे थे।एसडीएम दफ्तर के ठीक पीछे कार्यालय नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र संभल पर ताला लटका मिला जबकि आपूर्ति कार्यालय में पूर्ति निरीक्षक कुलदीप जैन भी नहीं पहुंच सके। बीआरसी केंद्र में बीईओ सुनील कुमार सक्सेना और एबीआरसी की कुर्सी भी खाली पड़ी थी। कम्प्यूटर आपरेटर जरूर कार्यालय में मौजूद मिला। पड़ोस में ही एडीएम लवकुश कुमार त्रिपाठी भी कार्यालय में मौजूद नहीं मिले।

नई तहसील पर स्थित कार्यालय में भी एसडीएम दीपेंद्र यादव की कुर्सी खाली पड़ी थी। यहां मुहल्ला जगत की हुस्नबानो ने बताया कि बेटी का जन्म प्रमाण पत्र बनवाना है। आधा घंटे से यहां हूं लेकिन साहब नहीं आए हैं। तहसील पर स्थित एआरटीओ अम्बरीश कुमार और तहसीलदार करम सिंह चौहान भी गायब रहे। वहीं दस बजे एएसपी आलोक कुमार जायसवाल कार्यालय में पत्रावलियों को निपटाने में जुटे दिखाई दिए। बात ब्लाक कार्यालय की करें तो बीडीओ रेणु कुमारी मौजूद नहीं मिली। बाबुओं का भी अतापता नहीं था। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.एलके गुप्ता मौजूद मिले। बहरहाल, इस रियलिटी चेक से इतना तो साफ हो गया कि अधिकारी प्रदेश सरकार के निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं और जनता न्याय मिलने की उम्मीद में भटकने के लिए मजबूर है।

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