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29 नवंबर, 2020|10:34|IST

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सीता हरण प्रसंग का मंचन देख भर आईं आंखें

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चन्दौसी के बनियाठेर क्षेत्र के गांव बनियाखेड़ा में चल रही 11 दिवसीय रामलीला के पांचवें दिन कलाकारों ने बड़े ही मार्मिक ढंग से सीता हरण का मंचन किया। सीता हरण प्रसंग का मंचन देख श्रद्धालुओं की आंखे भर आयीं। इस दौरान श्री राम के जयकारे भी गूंजते रहे।

कथावाचक कर्मवीर सिंह यादव ने बताया कि जब पंचवटी पर भगवान श्री राम-सीता और लक्ष्मण के साथ रहने लगे। तो वहां पर एक सुंदरी प्रकट हुई। इसका नाम था सुपर्णखा। वह लंकापति रावण की बहन थी और वह राम लक्ष्मण को देखकर मोहित हो गई। उनसे अपनी शादी की जिद पर अड़ गयी। भगवान श्री राम ने कहा कि मैं मर्यादा पुरुषोत्तम हूं। लक्ष्मण ने कहा कि मैं प्रभु की सेवा करने आया हूं। मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता। लक्ष्मण ने क्रोधित होकर उसकी नाक व कान काट लिए। नाक कान कटने के बाद सुपर्णखा अपने भाई खरदूषण के पास पहुंची। राम ने सभी का वध कर दिया। उसके बाद रावण मारीच के पास पहुंचा जो तरह-तरह के भेष बनाने जानता था। रावण के कहने पर मारीच सोने का मृग बन कर श्री राम की कुटिया के पास पहुंचा। सीता जी की मृग पर नजर पड़ी तो सीता जी ने कहा कि पभु जाओ मुझे इसे मारकर लाओ। तब राम ने कहा कि यह राक्षसों की चाल है। सीता जी की हठ के आगे राम को उसके पीछे जाना पड़ा और मृग राम की आवाज में लक्ष्मण को मदद के लिए बुलाने लगा। इस पर लक्ष्मण कुटिया के चारों ओर रेखा खींच कर बड़े भाई की मदद को चले गए। इसी बीच साधुवेशधारी रावण ने सीता माता का हरण कर लिया।

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  • Web Title:Sita came to see the staging of Haran episode