पुलिस का दावा, हिंसा में शामिल था आलम

Jan 16, 2026 12:13 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, संभल
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Sambhal News - 24 नवंबर 2024 को संभल हिंसा में गोली लगने से घायल युवक आलम के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। पुलिस का दावा है कि आलम हिंसा में शामिल था। घटनास्थल से कोई ठेला नहीं मिला है, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस का दावा, हिंसा में शामिल था आलम

24 नवंबर 2024 को हुई संभल हिंसा में गोली लगने से घायल हुए युवक आलम को लेकर मामला लगातार नया मोड़ ले रहा है। जहां एक ओर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने एएसपी अनुज चौधरी, इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि आलम स्वयं हिंसा में शामिल था और उसकी तलाश अभी भी जारी है। एसआईटी प्रभारी सीओ कुलदीप कुमार ने बताया कि आलम का नाम अपराध संख्या 333/24 की एफआईआर में शामिल है और जांच में उसकी सक्रिय भूमिका सामने आई थी। उन्होंने ने बताया कि आलम नखासा थाना क्षेत्र के अंजुमन तिराहे के पास का निवासी है और हिंसा के दौरान मौके पर मौजूद था।

पुलिस ने इस मामले में कई सवाल भी उठाए हैं। पुलिस का कहना है कि जिस समय शाही जामा मस्जिद में एडवोकेट कमिश्नर का सर्वे चल रहा था, उस दौरान नखासा तिराहा, टंडन तिराहा, डाकखाना रोड, मनोकामना रोड समेत सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग कर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ऐसे में आलम द्वारा ठेला लेकर वहां पहुंचने का दावा संदेह के घेरे में है। सीओ ने बताया कि घटनास्थल से कोई ठेला भी बरामद नहीं हुआ। आलम को जो गोली लगी है, वह 32 बोर की है। जबकि 32 बोर के कारतूस आमतौर पर तमंचा, रिवॉल्वर या निजी पिस्टल में उपयोग होते हैं। पुलिस के अनुसार, उनके पास 32 बोर की सरकारी पिस्टल नहीं होती, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि गोली किस हथियार से चली। सर्वे के दौरान जामा मस्जिद के पीछे के रास्तों से लोग धीरे-धीरे एकत्र होने लगे। कुछ ही मिनटों में धार्मिक नारेबाजी के साथ स्थिति बेकाबू हो गई और पथराव शुरू हो गया। इसके बाद भीड़ में शामिल लोगों द्वारा पुलिस पर फायरिंग भी की गई। बता दें मोहल्ला खग्गू सराय अंजुमन निवासी यामीन की याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर की अदालत ने करीब 11 महीने की सुनवाई के बाद मंगलवार को तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी समेत पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। यामीन का आरोप है कि उनके बेटे आलम को पुलिस ने गोली मारी थी। फिलहाल इस पूरे मामले ने प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर हलचल तेज कर दी है।

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