
सर्दी में तीन ट्रेनें बंद, चंदौसी के यात्रियों और व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें
Sambhal News - रेलवे ने चंदौसी से होकर जाने वाली तीन ट्रेनों को दिसंबर से बंद करने का निर्णय लिया है, जिसमें दो पैसेंजर और एक साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन शामिल हैं। इससे स्थानीय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा और वेंडरों की बिक्री भी प्रभावित होगी। यात्रियों ने रेलवे से ट्रेनों को बंद न करने की मांग की है।
रेलवे द्वारा चंदौसी से होकर तीन ट्रेनें दिसंबर से सर्दी के मौसम को देखते हुए बंद की जा रही हैं। इनमें दो पैसेंजर ट्रेनें समेत एक साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन शामिल है। पैसेंजर ट्रेन बंद होने से स्थानीय यात्रियों को ठंड के मौसम में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही ट्रेन बंद होने से प्लेटफॉर्म पर खाने-पीने का सामान बेचने वाले वेंडर भी प्रभावित होंगे। रेलवे प्रशासन एक दिसंबर से मुरादाबाद–चंदौसी–बरेली रूट पर चलने वाली पैसेंजर ट्रेन, दिल्ली से बरेली जाने वाली पैसेंजर ट्रेन तथा कामाख्या एक्सप्रेस को रद्द करने जा रहा है। दिल्ली–बरेली आने-जाने के लिए दिल्ली–बरेली पैसेंजर ट्रेन से प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री सफर करते हैं।
यह ट्रेन आमजन के लिए बेहद उपयोगी है। इसी तरह मुरादाबाद से बरेली जाने वाली ट्रेन सुबह 9:00 बजे चंदौसी पहुंचती है और लौटकर 2:00 बजे बरेली से चंदौसी आती है। इससे नौकरीपेशा, वकील, छात्र, ग्रामीण काफी संख्या में सफर करते हैं। इस ट्रेन से उन्हें सस्ता व सुलभ सफर करने को मिल जाता है। कामाख्या से चलकर आनंद विहार जाने वाली कामाख्या एक्सप्रेस साप्ताहिक ट्रेन से भी लोग काफी संख्या में सफर करते हैं और कामाख्या देवी के दर्शन के लिए जाते हैं। अब सर्दी के मौसम को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने इन तीनों ट्रेनों को बंद किए जाने का निर्णय लिया है। इससे स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। ट्रेन बंद होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इसको लेकर दैनिक यात्री व व्यापारी रेलवे को ज्ञापन सौंप चुके हैं। ज्ञापन सौंपकर उन्होंने ट्रेनों को बंद न किए जाने की मांग की है। जबकि रेलवे प्रशासन कोहरे के चलते यह ट्रेनें बंद करने का निर्णय ले चुका है। इन ट्रेनों के बंद होने से रेलवे स्टेशन पर खानपान का सामान बेचने वाले वेंडर भी प्रभावित होंगे, क्योंकि इन ट्रेनों के आवागमन से उनकी खासी बिक्री होती है। क्या कहते हैं शहरवासी चंदौसी रेलवे स्टेशन से गिनी-चुनी ही ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें से कुछ ट्रेनों को दिसंबर से फरवरी माह तक कोहरे का बहाना बनाकर बंद कर दिया जाता है, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है। – मयंक वार्ष्णेय, निवासी गणेश कॉलोनी एक दिसंबर से बंद हो रही ट्रेनों से सबसे ज्यादा बरेली की ओर यात्रा करने वाले दैनिक व अन्य यात्रियों को नुकसान होगा, क्योंकि मात्र टनकपुर जनशताब्दी एक्सप्रेस ही दिन में बरेली की ओर जाने के लिए बची है, जिसमें भी रिजर्वेशन चलता है। – दीपेश वार्ष्णेय, ब्रह्म बाजार, चंदौसी हर वर्ष रेलवे द्वारा इन ट्रेनों को बंद करने का मुख्य कारण पता नहीं लगता। दैनिक यात्री कई बार इसका विरोध भी कर चुके हैं, लेकिन रेल प्रशासन उनकी समस्या का समाधान नहीं करता। – यश मदान, निवासी पंजाबी कॉलोनी, चंदौसी मुरादाबाद से 8:00 बजे चलकर बरेली की ओर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन से मुरादाबाद से आने वाले दैनिक यात्रियों को काफी फायदा होता है। जहां 10 रुपये में सफर मिलता है, वहीं बस से अब 100 रुपये एक ओर का खर्च करना पड़ेगा। आम आदमी पर ट्रेन बंद होने से काफी बोझ बढ़ जाएगा। – मुदित गर्ग, आजाद रोड, चंदौसी क्या कहते हैं जिम्मेदार यह ट्रेनें सर्दी के मौसम में प्रतिवर्ष बंद की जाती हैं। इसीलिए इस वर्ष भी बंद की जा रही हैं। क्यों बंद की जाती हैं, यह रेलवे प्रशासन का अपना निर्णय है। – राजू कुमार, स्टेशन अधीक्षक, चंदौसी कोहरे का बहाना बनाकर न की जाए ट्रेन बंद : उद्योग व्यापार मंडल अखिल भारतीय युवा उद्योग व्यापार मंडल ने मंगलवार को रेलवे महाप्रबंधक को संबोधित ज्ञापन कार्यवाहक स्टेशन अधीक्षक रजनीश कुमार को सौंपा, जिसके माध्यम से चंदौसी की उपेक्षा पर गहरी नाराज़गी जताई। संगठन ने मांग की कि कोविड काल में बंद की गई सभी ट्रेनों को तुरंत पुनः संचालित किया जाए तथा कोहरे का बहाना बनाकर किसी भी अन्य ट्रेन को बंद न किया जाए। व्यापारियों ने कहा कि ट्रेनों के बंद होने से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बाहर से माल मंगाना महंगा पड़ रहा है और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। उनकी मांग है कि चंदौसी जैसे पुराने जंक्शन को नजरअंदाज़ न किया जाए, क्योंकि ट्रेनों की कमी से बाज़ारों में खरीदार भी कम पहुंचते हैं और पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां धीमी हो जाती हैं। नगर अध्यक्ष अनुज वार्ष्णेय अन्नू ने कहा कि चंदौसी रेलवे स्टेशन दिन-ब-दिन सफेद हाथी बनता जा रहा है। जंक्शन सिर्फ नाम का रह गया है। हालात ऐसे हैं जैसे स्टेशन को हाल्ट में बदल दिया गया हो। नाम मात्र की कुछ ट्रेनें चल रही हैं और केंद्र सरकार नई-नई ट्रेनें शुरू तो कर रही है, पर चंदौसी के साथ लगातार सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। कोरोना काल में बंद हुई कई ट्रेनें अभी तक बहाल नहीं हुईं। वहीं कुछ माह बाद कोहरे का बहाना बनाकर बाकी चलने वाली ट्रेनों को भी बंद करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इससे न यात्रियों को सुविधा मिलेगी और न व्यापारियों को राहत। शाह आलम मंसूरी ने कहा कि ट्रेन का सफर सबसे सस्ता, सुरक्षित और आम जनता के लिए सुविधाजनक माना जाता है, लेकिन जब ट्रेनें बंद होती हैं तो लोगों को मजबूरी में बस या निजी वाहनों से यात्रा करनी पड़ती है, जिससे किराया कई गुना बढ़ जाता है। आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ पड़ता है और व्यापारियों के लिए माल ढुलाई महंगी हो जाती है। संगठन ने रेलवे प्रशासन को चेताया कि यदि जल्द ही ट्रेन सेवाएं बहाल न हुईं और चंदौसी को उसका उचित अधिकार न मिला, तो व्यापारी समुदाय बड़ा आंदोलन करने पर मजबूर होगा। ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. टीएस पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष शाह आलम मंसूरी, भाजपा नेता शुभम अग्रवाल, विक्रम, आदित्य राणा, रितिक वार्ष्णेय, जावेद आदि शामिल रहे।

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