Sambhal News: उर्दू अभिलेखों में उलझी जांच, रिटायर्ड कानूनगो और अनुवादक का लिया गया सहारा
Sambhal News: नगर पालिका और दावेदारों के बीच 35 बीघा भूमि का स्वामित्व विवाद अभी भी हल नहीं हो पाया है। पुराने अभिलेखों की जांच में भाषा और दस्तावेजों की अस्पष्टता के कारण समस्या पैदा हो गई है। हाईकोर्ट ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं, लेकिन उचित सहयोग नहीं मिल पाने के कारण सीमांकन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी।

Sambhal News: शहर की बहुचर्चित 35 बीघा भूमि के स्वामित्व विवाद की जांच बुधवार को भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। नगर पालिका परिषद और दावेदार पक्ष के बीच चल रहे विवाद में पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच की गई, लेकिन दशकों पुराने रिकॉर्ड उर्दू भाषा में होने और कई दस्तावेज स्पष्ट न होने के कारण जांच प्रक्रिया उलझ गई। अधिकारियों को अभिलेखों का मिलान करने के लिए रिटायर्ड कानूनगो और उर्दू अनुवादक की मदद लेनी पड़ी। गुरुवार को फिर से मामले की जांच की जाएगी। नगर पालिका का दावा है कि विवादित भूमि उसकी संपत्ति है। वहीं सईदउद्दीन खां व उनके परिवार का कहना है कि यह जमीन उनके द्वारा नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से खरीदी गई थी।
दावे की पुष्टि के लिए पालिका ने सईदउद्दीन खां, शाहबुद्दीन खां, जमीरउद्दीन खां, मेराजउद्दीन खां और फरीदउद्दीन खां को नोटिस जारी कर नीलामी से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, संबंधित पक्ष कोई प्रमाणिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका। मामला वर्ष 2025 में सिविल रिट याचिका संख्या 1174/2025 के रूप में हाईकोर्ट पहुंचा था। 20 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने विवादित भूमि की पैमाइश और तथ्यों की जांच कराने के आदेश दिए थे। अदालत के निर्देशों के अनुपालन में नगर पालिका प्रशासन ने बीते वर्ष 11 जून को संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर सीमांकन प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिल सका। इसके बाद 19 मई को फिर से पैमाइश का प्रयास किया गया, लेकिन उस समय भी सीमांकन की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। बाद में 3 जुलाई को बाजार गंज क्षेत्र के हिंदू परिवारों और व्यापारियों ने डीएम अंकित खंडेलवाल से मामले की शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
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