Sambhal News: पांच साल पुराना भूमि सीमांकन विवाद सुलझा, नहर निर्माण की राह हुई साफ
Sambhal News: सिकंदरपुर करछली गांव में पांच साल से चल रहा भूमि सीमांकन विवाद प्रशासन के हस्तक्षेप से हल हो गया। जनसुनवाई में शिकायत के बाद, जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व और सिंचाई विभाग ने विवादित भूमि को सीमांकित कर नहर निर्माण के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई। इससे निर्माण में रुकावट दूर हो गई।

Sambhal News: जनसुनवाई में पहुंची एक शिकायत के बाद प्रशासन ने करीब पांच साल से लंबित भूमि सीमांकन विवाद का समाधान करा दिया। सिकंदरपुर करछली गांव में गाटा संख्या 174 और 175 के बीच सीमा को लेकर चल रहे विवाद के कारण मध्य गंगा नहर के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित करने और कब्जा लेने की कार्रवाई अटकी हुई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन कराया और विवादित भूमि को स्पष्ट रूप से चिह्नित कर मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-8, बुलंदशहर को कब्जा दिला दिया। इससे नहर निर्माण में आ रही बाधा दूर हो गई है।
ग्राम सिकंदरपुर करछली निवासी सुंदर पुत्र भूर सिंह ने जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल के समक्ष भूमि और नहर निर्माण से संबंधित शिकायत रखी थी। शिकायत में गाटा संख्या 174 और 175 के मध्य सीमांकन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद की जानकारी दी गई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सम्भल विकास चंद्र को कार्रवाई के निर्देश दिए। एसडीएम के निर्देशन में नायब तहसीलदार अरविंद कुमार के नेतृत्व में राजस्व टीम मौके पर पहुंची और संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद दोनों गाटों के बीच सीमांकन की कार्रवाई कराई। जांच में सामने आया कि दोनों गाटों के बीच सीमांकन का विवाद करीब पांच वर्षों से चला आ रहा था। सीमा स्पष्ट नहीं होने के कारण नहर निर्माण के लिए भूमि को चिह्नित करने में दिक्कत आ रही थी। इसके अलावा पूर्व में किए गए बैनामों के आधार पर संबंधित भूमि पर कब्जा दिलाने की कार्रवाई भी आगे नहीं बढ़ पा रही थी। राजस्व टीम ने मौके पर सीमांकन कर भूमि की स्थिति स्पष्ट की। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में मध्य गंगा नहर निर्माण खंड-8, बुलंदशहर को संबंधित भूमि पर कब्जा दिलाया गया। सीमांकन विवाद खत्म होने के बाद नहर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। इससे लंबे समय से अटका निर्माण कार्य आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से जहां पांच साल पुराने विवाद का समाधान हुआ, वहीं नहर निर्माण से जुड़ी भूमि संबंधी बाधा भी दूर हो गई।


