फिरौती के लिए 10 वर्षीय बच्चे का अपहरण कर हत्या मामले में दोषियों को आजीवन कारावास
कुढ़फतेहगढ़ के गांव इमरतपुर स्योंडारा में 2015 में 10 वर्षीय सोनू का अपहरण कर हत्या कर दी गई थी। न्यायालय ने 10 साल बाद दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। ये मामला संभल पुलिस की प्रभावी पैरवी से सुलझा।

कुढ़फतेहगढ़ थाना क्षेत्र के गांव इमरतपुर स्योंडारा में वर्ष 2015 में 15 लाख रुपये की फिरौती के लिए 10 वर्षीय बच्चे का अपहरण करने के बाद हत्या कर दी थी। मृतक के पिता ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में 10 साल बाद हत्यारों को न्यायालय एफटीसी-2 मुरादाबाद ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। थानाक्षेत्र के गांव इमरतपुर स्योंडारा निवासी मानसिंह के दस वर्षीय बेटे सोनू का 21 फरवरी 2015 की रात अपहरण कर लिया था। सोनू उस रात को पड़ोसी सोमपाल के लड़के विजयपाल के साथ रात में करीब 12 बजे बारात देखने गया था जो वापस नहीं लौटा।
अगले दिन मानसिंह के फोन कर कॉल आया, और कहा कि सोनू उनके पास है। अगर लड़का सुरक्षित वापस लेना है तो 15 लाख रुपये दे दो। पीड़ित ने 24 फरवरी को थाने में रिर्पोट दर्ज कराई। फिरौती की रकम नहीं दे पाने पर आरोपियों ने सोनू की हत्या कर दी थी। 2015 के मामले में न्यायालय एफटीसी-2 मुरादाबाद ने आरोपी प्रेमपाल व नरेश निवासी इमरतपुर स्योंडारा को दोषी माना और मंगलवार को दोनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों दोषियों पर 35-35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि संभल पुलिस की प्रभावी पैरवी से 10 वर्ष पुराने मामले में सजा सुनाई गई है। सजा कराने में एडीजीसी महेंद्र सिंह कश्यप और कोर्ट पैरोकार कंचन टाक का योगदान सराहनीय रहा।
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