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संभल मंडी में भीगा किसानों का सैकड़ों कुंतल धान, नुकसान

हिन्दुस्तान टीम,संभलNewswrap
Sun, 17 Oct 2021 11:50 PM
संभल मंडी में भीगा किसानों का सैकड़ों कुंतल धान, नुकसान

संभल मंडी समिति में ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर धान की फसल बेचने के लिए पहुंचे किसानों का सैकड़ों कुंतल धान बेमौसम हुई बरसात से बह गया। हजारों कुंतल धान मंडी में आढ़तियों के पास फसल ढ़कने की व्यवस्था नहीं होने के कारण भीग गया। मंडी में धान बेचने के लिए लेकर पहुंचे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

रविवार को जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के हजारों किसान रविवार को संभल गल्ला मंडी धान की फसल बेचने के लिए पहुंचे। रविवार सुबह दिन निकलने से पहले ही मंडी गेट तक ट्रैक्टर-ट्रालियों की लाईन लग गई। दस बजे के बाद बरसात शुरू हुई तो सैकड़ों किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरी धान की फसल आढ़तियों की आढ़त पर जमीन पर ढ़ेरों के रूप में पड़ी थी। अचानक आई तेज बरसात से कुछ देर में ही मंडी परिसर में जलभराव हो गया। किसानों को जमीन पर पड़ी फसल को उठाने का मौका ही नहीं किया। जिन किसानों के पास पन्नी थी, उन्होंने फसल को ढ़क दिया लेकिन जिन किसानों के पास पन्नी नहीं थी। उनकी फसल पानी भी भीगने के साथ ही बह गई। आढ़तियों के पास भी धान की फसल ढ़कने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मंडी परिसर में सैकड़ों कुंतल धान पानी में बह गया। जिससे किसानों को खेतों के साथ ही मंडी में भी भारी नुकसान हुआ है।

क्या कहते हैं किसान.....

ट्रैक्टर-ट्राली में भरकर 40 कुंतल धान लेकर आए थे। धान का भाव तय हो गया था। ट्राली में भरी फसल जमीन पर पर पड़ी थी। अचानक आई बरसात से कई कुंतल धान बह गया। जो बचा है, उसमें काफी खराब हो जाएगा।

रामचंद्र, निरयावली

धान की फसल आढ़त पर जमीन पर पड़ी थी। बरसात ने सब बिगाड़ दिया। करीब पांच कुंतल धान तो पानी में ही बह गया। जो बचा है उसे व्यापारी नहीं खरीदेगा।

तैय्यब हुसैन, ब्रह्मपुर

धान की ट्राली लेकर मंडी पहुंचे। आढ़त पर धान उड़ेल दी। बरसात से फसल पूरी भीग गई। कई कुंतल धान नालों में बह गया। अब घर ले जाकर फसल सुखानी पड़ेगी, उसी के बाद बिक्री होगी।

दरियाब, निरयावली

सुबह मौसम अच्दा था। घर से पन्नी भी लेकर नहीं आए, ऐसा क्या पता था कि इतनी बरसात होगी। करीब दस कुंतल धान तो मंडी के नालों में ही बह गया। जो बचा है उसे काफी मेहनत करने के बाद बेचने लायक किया जाएगा।

ओमकार, खेड़ाखास

आढ़ती के पास धान की फसल ढ़कने की व्यवस्था नहीं थी। घर से भी पन्नी लेकर नहीं आए। ऐसा पहली बार हुआ है कि मंडी में नुकसान होने के बाद वापस घर धान ले जाना पड़ रहा है। कई कुंतल धान नालों में ही बह गया।

प्रमोद, खिरनी

धान की फसल ट्राली ही भीग गई। करीब 25 कुंतल धान है। इसे सुखाकर बेचने के लिए काफी खर्च आएगा। दाने का रंग भीगकर खराब हो जाने के कारण भाव भी कम मिलेगा।

ताहिर, ढ़किया नरूप

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