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20 जनवरी, 2021|11:53|IST

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हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ें छात्राएं तो सफलता चूमेगी कदम

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ें छात्राएं तो सफलता चूमेगी कदम

1 / 3बुलंद हौंसले हों तो मंजिल पाने में आसानी होगी। निडर होकर लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ चले तो सफलता जरूर...

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ें छात्राएं तो सफलता चूमेगी कदम

2 / 3बुलंद हौंसले हों तो मंजिल पाने में आसानी होगी। निडर होकर लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ चले तो सफलता जरूर...

हिन्दुस्तान मिशन शक्ति : बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़ें छात्राएं तो सफलता चूमेगी कदम

3 / 3बुलंद हौंसले हों तो मंजिल पाने में आसानी होगी। निडर होकर लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ चले तो सफलता जरूर...

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बुलंद हौंसले हों तो मंजिल पाने में आसानी होगी। निडर होकर लक्ष्य को पाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ चले तो सफलता जरूर मिलेगी। संघर्षों के साथ लक्ष्य को पाने के लिए जिंदगी इम्तिहान लेगी तो उस उस इम्तिहान को भी पास करना होगा। तभी कदम कदम पर सफलता मिलेगी।

यह प्रेरक बातें सोमवार को बहजोई के काली मंदिर रोड स्थित कृष्ण मुरारी मनोरमा अग्रवाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित हिन्दुस्तान मिशन शक्ति अभियान के दूसरे चरण में उन तीन शख्सियतों ने समझाये जो खुद संघर्षों से जूझ कर बालिकाओं को आत्मनिर्भर व सशक्त बनाने के लिए जागरूकता का प्रकाश फैला रही हैं। कार्यक्रम में छात्राओं ने बड़ी बेबाकी से उन शख्सियतों से अपनी शंकायें साझा कीं तो शख्सियतों ने भी उनका हौंसला बढ़ाते हुए लक्ष्य की ओर एकाग्रता से आगे बढ़ने का आह्वान किया। संचालन कर रहीं कृष्ण मुरारी मनोरमा अग्रवाल सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कालेज की शिक्षिका सृष्टि वार्ष्णेय कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन शक्ति कार्यक्रम के तहत हिन्दुस्तान मिशन शक्ति अभियान बेटियों को सशक्त बनाने तथा उन्हें जागरूक करने के लिए चलाया जा रहा है। गांव ढाकारी की ग्राम प्रधान सुशीला देवी ने छात्राओं को अपने संघर्ष की गाथा बताते हुए कहा कि वह पुरुष प्रधान देश में गांव की वर्ष 2016 में प्रधान बनी। उन्होंने शुरू से ही गांव में विकास कार्य करने प्रारंभ किए तो उन्हें तरह-तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत सबसे पहले ग्रामीणों को खुले में शौच न जाने के लिए प्रेरित किया तो इसमें गांव के लोग ही उन्हें भला बुरा कहने लगे। काफी संघर्ष के बाद जब घर-घर शौचालय बनवाए गए तो पूरा गांव ओडीएफ हो गया। आज उनके गांव में कोई भी खुले में शौच नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि वह आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ गांव की महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में आज भी काम कर रही हैं। योग शिक्षिका अर्चना मित्तल ने कहा कि हमें सुरक्षा के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत होना होगा। निडर होकर कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर 1090, 181, 1098, 112 चलाए जा रहे हैं। इन नंबरों पर डायल कर छात्राएं मुश्किल समय में पुलिस की सहायता ले सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को योग की क्रिया में बताते हुए शारीरिक रूप से मजबूत होने के टिप्स दिए। चंदौसी की ताइक्वांडो प्रशिक्षक जयारानी ने बताया कि वह ताइक्वांडो से अपनी सुरक्षा को लेकर तो सदैव तत्पर रहती हैं। इसके साथ-साथ वह अन्य छात्राओं को भी प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान करते हुए कहा कि छात्राएं शिक्षा पाने के साथ-साथ खुद की सुरक्षा के लिए भी सजग रहें । लक्ष्य बनाकर अगर कोई भी कार्य करेंगे तो उन्हें जरूर सफलता मिलेगी। सफलता के लिए बुलंद हौंसले और निडरता की जरूरत रहती है। एक बार जो लक्ष्य बना लिया तो कठिन संघर्ष भी आए तो पीछे नहीं हटना चाहिए। दृढ़ संकल्प के साथ रहे तो सफलता जरूर मिल जाएगी।

बोली शख्सियत

छात्राओं को अगर सफलता पानी है तो संघर्ष कर समाज में अपनी पहचान बनानी होगी। लक्ष्य तय करके आगे बढ़ना है तो दृढ़ संकल्प के साथ कार्य करना होगा। लक्ष्य की प्राप्ति में बाधाएं सामने आए तो कठिन परिश्रम से उन्हें दूर करना होगा। तब ही हर कदम पर सफलता मिलेगी। विषम परिस्थितियों से हार कर बैठ गए तो सफलता की सीढ़ी कभी नहीं पढ़ पाएंगे।

- सुशीला देवी, ग्राम प्रधान

आज छात्राओं के लिए आगे बढ़ने के लिए बहुत सारे प्लेटफार्म है। सफलता पाने के लिए हमें हर कदम पर सोच समझकर कदम रखना होगा। जिस लक्ष्य को बना लिया है उस लक्ष्य को पाने के लिए शत प्रतिशत प्रयास करने होंगे। अगर हमने शत प्रतिशत प्रयास कर लिए तो कोई भी लक्ष्य ऐसा नहीं जिसे हम पा न सकें। मुश्किल समय आए तो हमें अपने अभिभावकों तथा गुरुजनों से लक्ष्य का रास्ता प्राप्त करना होगा। सही रास्ते पर चले तो सफलता खुद-ब-खुद उन्हें मिल जाएगी।

- जया रानी, ताइक्वांडो प्रशिक्षक

छात्राएं दूसरों पर निर्भर न रहें, खुद अपने भविष्य के लिए जो भी लक्ष्य तय करें उसे अपने अभिभावकों और शिक्षकों से साझा करें वह भी उनके साथ आकर सफलता के लिए अथक प्रयास करेंगे। उन्होंने योग प्रशिक्षक बनने से पहले कठिन परिश्रम किया। तभी अपने लक्ष्य तक आगे बढ़ीं। आज वह खुद आत्मनिर्भर बनकर अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

अर्चना मित्तल, योग शिक्षिका

पूछे सवाल

कक्षा 11 की छात्रा संपदा गुप्ता ने पूछा कि वह चिकित्सक बनकर गरीबों की सहायता करना चाहती हैं। जिसके लिए उन्हें क्या करना चाहिए। हिन्दुस्तान मिशन शक्ति कार्यक्रम में उनका हौसला बढ़ाया है। पैनल में मौजूद महिलाओं ने कहा कि चिकित्सक बनने के लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। अगर उन्होंने लक्ष्य बनाकर काम किया तो उन्हें सफलता जरूर मिल जाएगी।

कक्षा 11 की ही छात्रा समृद्धि गुप्ता ने बताया कि वह पुलिस में नौकरी करना चाहती हैं और जो लोग न्याय के लिए इधर-उधर भटकते हैं। उन्हें न्याय दिलाने का कार्य करना चाहती हैं। मौजूद शख्सियत ने उन्हें बताया कि उनका लक्ष्य बहुत ही सुंदर है। निडर होकर शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बने तो उन्हें अपनी मंजिल जरूर मिल जाएगी। लगन मेहनत से शिक्षा ग्रहण करें। कक्षा 12 की छात्रा लक्षिता ने कहा कि वह शिक्षिका बनकर गरीब बच्चों को शिक्षित करना चाहती हैं। जो बच्चे शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं। उन तक शिक्षा का दीपक जलाना है। महिलाओं ने उन्हें बताया कि अपना ध्यान केंद्रित करते हुए शिक्षा ग्रहण करें तो हर कदम सफलताएं मिलेंगी। हिन्दुस्तान मिशन शक्ति कार्यक्रम से उनकी तमाम संकाय कुछ हद तक दूर हो गई होंगी।

बोली शिक्षिकाएं

बेटियों को हर परिस्थिति में डटकर सामना करना चाहिए। जो उन्होंने अपनी आंखों में ख्वाबों को सजाया है उन्हें पूर्ण पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प जरूरी है। अभी से ही अगर उन्होंने अच्छा लक्ष्य बनाकर मेहनत से शिक्षा ग्रहण की तो उन्हें जरुर सफलता मिलेगी।

- सृष्टि वार्ष्णेय, शिक्षिका

बालिका शिक्षित होकर सशक्त बने किसी भी हालात में निपटने के लिए सक्षम बने। बिना संघर्ष के मंजिल तक नहीं पहुंचा जा सकता। विषम परिस्थितियों का सामना करने से ही सफलता मिलती है। संघर्षों से डरकर कहीं लक्ष्य से भटक गए तो सफलता नहीं मिल पाएगी।

- जागृति सिंह, शिक्षिका