
जामवंत ने हनुमान जी को याद दिलाया उनका बल
Sambhal News - चन्दौसी में श्री हनुमान कथा के तीसरे दिन, जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराया। सभी वानर समुद्र पार करने में डर रहे थे, लेकिन हनुमान ने एक ही छलांग में समुद्र पार कर लिया। कथा में हनुमान की साहस और शक्ति का वर्णन किया गया।
चन्दौसी। समुद्र पार करने में सभी वानर डर रहे थे। जब जामवंत ने हनुमान जी को उनका बल याद दिलाया तो वह एक ही छलांग में समुद्र पार कर गए। यह कथा व्यास शिव शंकर भारद्वाज ने श्री हनुमान कथा के दौरान व्यक्त किए। खातियान मुहल्ले के शिवपंचायत मंदिर में चल रही श्री हनुमान कथा के तीसरे दिन कथाव्यास ने हनुमान के सागर पार जाने के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सभी योद्धा अपने बल का बखान कर रहे थे। अंगद ने कहा कि वह पार तो जा सकते हैं, लेकिन वापस आने में संशय है। जामवंत ने कहा कि संशय से ग्रस्त व्यक्ति से कार्य पूरा होने की आशा नहीं की जा सकती ।
जो कर्म पूर्ण कर सकते हैं, वे चुप बैठे हैं। तब जामवंत ने हनुमान की ओर देखा और कहा कि हनुमान का अवतार ही राम काज के लिए हुआ है। यह सुनते ही हनुमान सोने के पहाड़ की तरह विशाल हो गए और कहने लगे कि रावण सहित सेना को मार देंगे। त्रिकूट पर्वत सहित लंका को जला देंगे या समुद्र में डुबो देंगे। जामवंत ने उन्हें केवल सीता की खोज करने का निर्देश दिया। इसके बाद सबको प्रणाम कर हनुमान चल दिए। एक ही छलांग में उन्होंने समुद्र पार कर लिया। कथा में दयानंद शर्मा, सर्वेश कुमार, रविंद्र कुमार, कमल माथुर, राधेश्याम माथुर आदि मौजूद रहे।

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