गन्ना में बढ़ा अंकुर छेदक और स्टीम बोरर का खतरा, पहली पीढ़ी सक्रिय
जनपद में मार्च में बोई गई गन्ने की फसल तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अंकुर और तना छेदक कीटों ने फसल पर हमला कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, कीटों की पहली पीढ़ी सक्रिय हो गई है। किसान कीटों के अंडे हटाने और प्रभावी उपायों के जरिए फसल की सुरक्षा कर सकते हैं।

जनपद में मार्च माह में बोई गई गन्ने की फसल अब अंकुरित होकर तेजी से विकास की ओर बढ़ रही है। खेतों में हरियाली लौट आई है और पौधों से कल्ले (नई शाखाएं) निकलने लगे हैं। लेकिन इसी महत्वपूर्ण अवस्था में अंकुर छेदक और तना छेदक कीटों ने फसल पर हमला कर दिया है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय गन्ने की फसल पर कीटों की पहली पीढ़ी सक्रिय हो चुकी है। अंकुर छेदक कीट छोटे-छोटे पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि तना छेदक कीट पौधे के अंदर प्रवेश कर उसे खोखला कर देते हैं।
इससे पौधा सूखने लगता है और फसल की बढ़वार रुक जाती है, जिसे “डेड हार्ट” की समस्या भी कहा जाता है।ऐसे पहचानें कीटों का प्रकोपसंभल। कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि किसान देखें कि कहीं गन्ने की पत्तियों की निचली सतह पर अंडों के समूह तो नहीं दिखाई दे रहे हैं। पौधे अचानक मुरझा या सूख तो नहीं रहे हैं। तनों में छेद या अंदर से खोखलापन तो नहीं है। कल्लों की वृद्धि तो नहीं रुक रही है। यदि समय रहते इन अंडों को नष्ट नहीं किया गया, तो निकलने वाली सूंडियां तने में प्रवेश कर गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं।बचाव के प्रभावी उपायसंभल। किसान पत्तियों पर दिखाई देने वाले अंडों को हाथ से नष्ट करें। प्रभावित पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर करें। 20-25 मीटर की दूरी पर फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इससे वयस्क कीट आकर्षित होकर फंस जाते हैं और उनका प्रजनन कम होता है। फिप्रोनिल या इमिडाक्लोप्रिड 40% डब्ल्यूजी का घोल बनाकर छिड़काव करें। छिड़काव सुबह या शाम के समय करें ताकि अधिक प्रभावी रहे। शुरुआती अवस्था में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। समय पर निगरानी, सही दवा का प्रयोग और संतुलित देखभाल से किसान अपनी गन्ने की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं।
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