
भरत मिलाप का मंचन देखकर भर आईं आंखें
Sambhal News - ग्राम भुलाबई में चल रही 11 दिवसीय रामलीला के पांचवे दिन भरत मिलाप का मंचन किया गया। भरत को वनवास का समाचार सुनकर दुख होता है और वे श्रीराम को वापस लाने के लिए वन की ओर निकलते हैं। भरत के भावुक अभिनय ने दर्शकों को प्रभावित किया और सभी की आंखें नम हो गईं।
थाना क्षेत्र के ग्राम भुलाबई में चल रही 11 दिवसीय रामलीला के पांचवें दिन मंगलवार को भरत मिलाप का करुणामयी व मनोहारी मंचन किया गया। श्री लघु आदर्श रामलीला कमेटी द्वारा शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित इस मंचन कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी अद्भुत अभिनय कला से दर्शकों के हृदय को भाव-विभोर कर दिया। प्रसंग के दौरान जब राजकुमार भरत को यह ज्ञात होता है कि उनकी माता कैकेयी ने उनके लिए राज्य और प्रभु श्रीराम के लिए चौदह वर्षों का वनवास मांगा है, तो वे व्यथित होकर माता को धिक्कारते हैं। उसी समय दासी मंथरा पर शत्रुघ्न का क्रोध फूट पड़ता है और वे उस पर पद प्रहार करते हैं।

दुखी भरत गुरु वशिष्ठ और अयोध्यावासियों के साथ प्रभु श्रीराम को वापस लाने के लिए वन की ओर प्रस्थान करते हैं। मार्ग में उनकी भेंट निषादराज से होती है। निषादराज को जब ज्ञात होता है कि भरत श्रीराम से मिलने जा रहे हैं, तो वे कहते हैं ‘थाली में फूल और तलवार दोनों रखो; यदि भरत तलवार उठाएँ तो युद्ध करने, और यदि फूल उठाएँ तो मनाने जा रहे हैं।’ भरत द्वारा फूलों की माला उठाते ही जय श्रीराम के जयकारे गूंज उठते हैं। वन पहुंचकर भरत प्रभु श्रीराम से अयोध्या लौटने की विनती करते हैं, किंतु प्रभु श्रीराम पितृ आज्ञा पालन का धर्म निभाने हेतु लौटने से मना कर देते हैं। दुखी भरत, उनके खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौटते हैं और उन्हें राजसिंहासन पर रखकर दास भाव से राज्य संचालन करते हैं। भरत मिलाप के इस भावुक प्रसंग के दौरान दर्शकों की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं रामलीला कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।

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