
ध्रुव कथा का प्रसंग सुनकर भाव-विहोर हुए श्रोता
Sambhal News - भटपुरा में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का तीसरा दिन भक्तिमय बना असमोली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम भटपुरा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज
असमोली ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम भटपुरा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत समागम देखने को मिला। श्री जी चैरिटेबल आई हॉस्पिटल द्वारा आयोजित इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथावाचक पंडित त्रिशांत कृष्ण शास्त्री ने इस अवसर पर ध्रुव और विदुर चरित्र का मनमोहक एवं प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया। जैसे-जैसे पंडित जी भगवान की भक्ति और प्रेम से जुड़े प्रसंगों का वर्णन करते गए, वैसे-वैसे भक्त भाव-विभोर होते गए। कथावाचक ने कहा कि “यदि पाँच वर्ष की आयु में बालक ध्रुव दृढ़ निष्ठा और सत्य भक्ति के बल पर भगवान को प्राप्त कर सकते हैं, तो फिर हम क्यों नहीं? जब मन से सच्ची भक्ति की जाती है, तो भगवान स्वयं अपने भक्तों से मिलने आ जाते हैं।

कथा के दौरान विभिन्न झांकियां भी सजाई गईं, जिन्हें देखकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। विदुर प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित त्रिशांत कृष्ण शास्त्री ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण दुर्योधन के छप्पन भोग को छोड़कर विदुरजी की कुटिया में प्रेमवश पहुंचे तथा वहां केलों के छिलकों का भोग भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोग के नहीं, प्रेम के भूखे होते हैं। कथा में आगे सृष्टि वर्णन का विस्तार से वर्णन किया गया, जिसे श्रोताओं ने गहरी रुचि से सुना।

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