शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर मामले में अब 21 जुलाई को सुनवाई
Sambhal News - शाही जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर के मामले में सिविल जज आदित्य कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत की, जबकि मुस्लिम पक्ष ने क्षेत्राधिकार पर आपत्ति जताई। गाजियाबाद की सिमरन गुप्ता ने भी मामले में पक्षकार बनने की प्रार्थना की है।

शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई की तारीख नियत की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट के सर्वे आदेश को बरकरार रखने के बाद हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति अदालत में दाखिल की। वहीं मुस्लिम पक्ष ने क्षेत्राधिकार समेत अन्य बिंदुओं को लेकर अपनी आपत्तियां दोहराईं। इस बीच गाजियाबाद निवासी एक महिला ने भी मामले में पक्षकार बनाए जाने के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के 19 मई 2025 के आदेश की प्रमाणित प्रति सिविल जज सीनियर डिवीजन आदित्य कुमार सिंह की अदालत में प्रस्तुत की गई।
वादी पक्ष के अधिवक्ता श्रीगोपाल शर्मा ने बताया कि जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी पहले सुप्रीम कोर्ट गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश करने के निर्देश देते हुए मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया था, जहां कई चरणों में सुनवाई हुई। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने इंतजामिया कमेटी की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के सर्वे आदेश को सही माना और निचली अदालत में सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए। वादी पक्ष की ओर से अदालत में विपक्षी पक्ष संख्या पांच और छह की ओर से जवाब दाखिल न किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया तथा उनका अवसर समाप्त करने की मांग की गई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय कर दी। सुनवाई के दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिवक्ता विष्णु कुमार शर्मा भी अदालत में मौजूद रहे। मुस्लिम पक्ष की ओर से अधिवक्ता शकील अहमद ने बताया कि मामले में पूर्ण सुनवाई नहीं हो सकी, इसलिए अदालत ने अगली तारीख निर्धारित की है। उन्होंने कहा कि इंतजामिया कमेटी की ओर से दाखिल याचिका में मुख्य रूप से यह कहा गया है कि मामले की सुनवाई का क्षेत्राधिकार सिविल जज सीनियर डिवीजन संभल के पास नहीं है। इसके अलावा सरकार के खिलाफ दावा करने से 60 दिन पूर्व नोटिस दिए जाने और वादी पक्ष के अनुरोध पर सर्वे आदेश जारी न किए जाने जैसे बिंदु भी उठाए गए हैं।इसी बीच गाजियाबाद निवासी सिमरन गुप्ता ने भी मामले में पक्षकार बनाए जाने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। उनका कहना है कि वह सनातन धर्म से जुड़ी हैं, इसलिए उन्हें भी मुकदमे में पक्षकार बनाया जाए। अदालत ने इस आवेदन पर वादी और प्रतिवादी पक्ष से 21 जुलाई तक आपत्ति मांगी है। उल्लेखनीय है कि 19 नवंबर 2024 को सिविल जज सीनियर डिवीजन न्यायालय ने कोर्ट कमिश्नर रमेश सिंह राघव को नियुक्त करते हुए शाही जामा मस्जिद के सर्वे के आदेश दिए थे। उसी दिन शाम को डीएम और एसपी की मौजूदगी में सर्वे कराया गया था। इसके बाद 24 नवंबर 2024 को दोबारा सर्वे के दौरान संभल में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और 29 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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