
संभल में बुलडोजर एक्शन से पहले ही लोगों ने खुद हटाई अवैध मस्जिद, भारी नुकसान से बचने की कवायद
संभल में ग्राम समाज की जमीन पर बनी मस्जिद पर सरकारी कार्रवाई से पहले ही मुस्लिम समाज के लोगों ने ढांचा हटाना शुरू कर दी। हथौड़ों से दीवारें तोड़ी गईं और निर्माण में लगा सामान सुरक्षित निकाल लिया गया, ताकि ध्वस्तीकरण के दौरान अधिक नुकसान न हो।
यूपी के संभल के असमोली थाना क्षेत्र में ग्राम समाज की जमीन पर बनी मदीना मस्जिद को लेकर प्रस्तावित प्रशासनिक कार्रवाई से पहले ही मुस्लिम समाज के लोगों ने जिम्मेदारी दिखाते हुए शनिवार को स्वयं ढांचा हटाने की पहल शुरू कर दी। शनिवार को हथौड़ों से दीवारें तोड़ी गईं और निर्माण में लगा सामान सुरक्षित निकाल लिया गया, ताकि ध्वस्तीकरण के दौरान अधिक नुकसान न हो।
असमोली थाना क्षेत्र के गांव सलेमपुर सालार उर्फ हाजीपुर में गाटा संख्या 641 की नवीन पर्ती भूमि पर बिना अनुमति के मस्जिद का पक्का निर्माण किया गया था। राजस्व अभिलेखों में यह भूमि ग्राम समाज के नाम दर्ज है, जिसका कुल रकबा करीब 439 वर्ग मीटर बताया गया है। इस अवैध निर्माण को लेकर कई वर्षों से विवाद चला आ रहा था। प्रशासन की ओर से 28 दिसंबर को नायब तहसीलदार बबलू कुमार के नेतृत्व में गठित राजस्व टीम ने मौके पर जांच की थी। जांच में अवैध निर्माण की पुष्टि होने पर हाजी शमीम के खिलाफ बेदखली का आदेश पारित किया गया। साथ ही सरकारी भूमि पर कब्जा करने के आरोप में 8.78 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। चार जनवरी 2026 को प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तय की गई थी।
खुद ही दीवारें हटाने लगे मुस्लिम समुदाय के लोग
कार्रवाई से एक दिन पहले ही समाज के लोगों ने स्वयं मस्जिद की दीवारें हटाने का कार्य शुरू कर दिया। लोहे के गेट, लकड़ी के दरवाजे, खिड़कियां और अन्य कीमती सामान पहले ही निकाल लिया गया, जिससे आर्थिक नुकसान कम किया जा सके। हालांकि ढांचा हटाने का कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय कार्यक्रम के अनुसार रविवार को भी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए दो नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को बुलडोजर और ट्रैक्टर-ट्राली के साथ मौके पर मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।
तहसीलदार संभल धीरेंद्र सिंह ने बताया कि अवैध निर्माण को लेकर वर्ष 2018 में लेखपाल द्वारा रिपोर्ट दी गई थी। उसी के आधार पर तहसीलदार न्यायालय में विधिवत वाद दर्ज कर सुनवाई की गई। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निर्माण को अवैध पाया गया, जिसके चलते नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।





