संभल जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद, एक साल में क्या-क्या हुआ?

Nov 19, 2025 09:25 am ISTAjay Singh कार्यालय संवाददाता, संभल
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संभल विवाद की शुरुआत 19 नवंबर 2024 को हुई थी। हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दावा किया कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद मूल रूप से हरिहर मंदिर है। उसी दिन शुरू हुआ सर्वेक्षण हिंसा और तनाव के कारण अधूरा रह गया। बाद में कोर्ट ने कमिश्नर रिपोर्ट मांगी, जो 5 मार्च 2025 को सीलबंद रूप में दाखिल कर दी गई।

संभल जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद, एक साल में क्या-क्या हुआ?

संभल की ऐतिहासिक जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद को आज एक साल पूरा हो गया है। कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट इस बहुचर्चित वाद के भविष्य का आधार बनेगी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसे खोलने पर रोक लगा रखी है। यह रिपोर्ट अब भी सील बंद लिफाफे में है। एक साल में यह वाद स्थानीय अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। 13 से अधिक तारीखें बीत चुकी हैं। तीन दिसंबर को अगली सुनवाई होनी है।

विवाद की शुरुआत 19 नवंबर 2024 को हुई थी। उस दिन हिंदू पक्ष ने सिविल कोर्ट में दावा किया कि वर्तमान शाही जामा मस्जिद मूल रूप से हरिहर मंदिर है। उसी दिन शुरू हुआ सर्वेक्षण हिंसा और तनाव के कारण अधूरा रह गया। बाद में कोर्ट ने कमिश्नर रिपोर्ट मांगी, जो 5 मार्च 2025 को सीलबंद रूप में दाखिल कर दी गई। हाईकोर्ट ने मई 2025 में साफ किया कि यह मामला पूजा स्थल अधिनियम 1991 से बाधित नहीं होता, और निचली अदालत को कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया। लेकिन जैसे ही केस आगे बढ़ रहा था। मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। एक साल में अदालतें बदलीं, आदेश बदले, और तारीखें बढ़ती रहीं, लेकिन सबसे अहम दस्तावेज, कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट। अब भी न्यायालय की आलमारी में सील बंद पड़ी है। इसी रिपोर्ट से तय होगा कि वाद किस दिशा में आगे बढ़ेगा। अब सभी की निगाहें 3 दिसंबर 2025 की सुनवाई पर टिकी हैं, लेकिन अंतिम निर्णय तक मामला सुप्रीम कोर्ट में ही अटका रहेगा। एक वर्ष बाद भी निष्कर्ष से दूर यह वाद संभल ही नहीं, पूरे देश की निगाहों का केंद्र बना हुआ है।

जब संभल का नाम सुर्खियों में आया...

19 नवंबर 2024 का वह दिन जब संभल का नाम पूरे प्रदेश ही नहीं, देशभर की सुर्खियों में आ गया था। शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद पर दायर वाद ने शहर का माहौल इस कदर बदल दिया था कि शाम ढलते-ढलते संभल की गलियाँ थम गई थीं, बाजार बंद हो गए थे और सुरक्षा बलों की तैनाती से पूरा शहर मानो छावनी में बदल गया था। आज उस घटनाक्रम को एक वर्ष पूरा हो गया है।

आक्रोशित भीड़ के कारण रोकना पड़ा था सर्वे

19 नवंबर 2024 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कोर्ट, संभल हिंदू पक्ष (हरिशंकर जैन, पार्थ यादव, महंत ऋषिराज गिरी, राकेश कुमार, जीतपाल यादव, मदन पाल, वेद पाल, महंत बालयोगी दीनानाथ) ने याचिका दायर कर शाही जामा मस्जिद को श्री हरिहर मंदिर होने का दावा किया था। कोर्ट ने उसी दिन परिसर के सर्वेक्षण के लिए कोर्ट कमिश्नर रमेश राघव नियुक्त किया और शाम को शाही जामा मस्जिद का सर्वे किया गया था। भीड़ के आक्रोश व सांसद के पहुंचने के कारण सर्वे को बीच में रोकना पड़ा था। जिस कारण सर्वे का कार्य अधूरा रह गया था।

22 अगस्त 2025 को हुआ था बड़ा आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए यथास्थिति बनाए रखने, किसी भी नए सर्वेक्षण पर रोक, तथा लिफाफा न खोलने के निर्देश दिए, जिसके बाद निचली अदालत की पूरी कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

क्या बोले मुख्य याचिकाकर्ता

मुख्य याचिकाकर्ता और कैला देवी मंदिर के महंत ऋषि राज गिरी ने कहा कि यह शाही जामा मस्जिद नहीं बल्कि सतयुग से यह हरिहर मंदिर है और आगे भी रहेगा। कोर्ट में मजबूत पैरवी की जा रही है। जल्द ही कोर्ट का निर्णय आएगा। कोर्ट कमिश्नर की सील बंद सर्वे रिपोर्ट इससे पर्दा उठाएगी।

क्या बोले शाही जामा मस्जिद के सदर

संभल की शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। दोनों लोग अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। सभी अपनी जीत के लिए अश्वस्त हैं। अंतिम निर्णय तो कोर्ट का है। कमेटी मजबूती से अपना पक्ष कोर्ट में रख रही है।

संभल में किस दिन क्या हुआ?

19 नवंबर 2024 सिविल कोर्ट में संभल के हिंदू पक्ष ने याचिका दायर की और पहला सर्वे हुआ।

24 नवंबर 2024 को मस्जिद सर्वेक् का दूसरा चरण हुआ, जिसके दौरान हिंसा भड़क गई।

08 नवंबर 2024 को हाई कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा।

05 मार्च 2025 को कोर्ट कमिश्नर ने सिविल कोर्ट में सील बंद लिफाफे में सर्वे रिपोर्ट सौंपी।

19 मई 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका खारिज कर दी।

05 अगस्त 2025 को सिविल कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अधिवक्ता प्रिंस शर्मा ने तीन प्रार्थना पत्र दाखिल किए।

21 अगस्त 2025 को सिविल कोर्ट में मस्जिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश पेश किया।

22 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

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