यूपी पंचायत चुनाव से पहले सपा का बड़ा ऐक्शन, इस जिले के अध्यक्ष को हटाया, पूरी कार्यकारिणी भंग की
बरेली में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने बड़ी कार्रवाई कर दी। प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने बरेली जिला अध्यक्ष को हटा दिया। साथ ही बरेली की सभी कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया।

यूपी के बरेली में समाजवादी पार्टी ने बड़ी कार्रवाई की है। पंचायत चुनाव से पहले बरेली की सियासत में बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए जिलाध्यक्ष शिवचरण कश्यप को पद से हटा दिया है। इसके साथ ही पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है। यह कार्रवाई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल द्वारा की गई है। संगठनात्मक फेरबदल को लेकर सियासी गलियारों में दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा।
सूत्रों के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब एसआईआर से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं और पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। इसी दौरान बीते कुछ महीनों से बरेली सपा संगठन अंदरूनी कलह, गुटबाजी और विवादों से जूझ रहा था, जिसकी लगातार शिकायतें लखनऊ तक पहुंच रही थीं। पार्टी नेतृत्व को आशंका थी कि मौजूदा संगठनात्मक ढांचे के साथ चुनावी मैदान में उतरना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि शिवचरण कश्यप लंबे समय से विवादों में घिरे हुए थे। कभी कथित हनीट्रैप और वीडियो वायरल होने की चर्चाएं तो कभी पार्टी पदाधिकारियों से टकराव, कार्यकर्ताओं से मारपीट और टिकट वितरण में पक्षपात जैसे आरोप उन पर लगते रहे। इन घटनाओं ने न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचाया, बल्कि संगठन की साख पर भी असर डाला। जिले में हालात इस कदर बिगड़ चुके थे कि वरिष्ठ कार्यकर्ता खुद को हाशिये पर महसूस करने लगे थे। इसके कारण कई बैठकों में वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल न होने की शिकायतें भी हाईकमान तक पहुंचीं।
पिछले करीब एक महीने से जिला और महानगर संगठन के बीच चल रहे टकराव की खबरें भी पार्टी नेतृत्व के संज्ञान में थीं। बताया जा रहा है कि इस आपसी खींचतान का सीधा असर बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती पर पड़ने लगा था। पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता सोशल मीडिया समेत विभिन्न मंचों पर खुलकर असंतोष जता रहे थे, जिससे चुनावी तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था।
पोस्टर विवाद बना अंतिम वजह
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में पार्टी मुख्यालय पर लगाए गए एक पोस्टर ने विवाद को और गहरा दिया। पोस्टर में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर गायब थी, जबकि उसमें एक संभावित चुनावी उम्मीदवार की तस्वीर लगाई गई थी। यह मामला लखनऊ मुख्यालय तक पहुंचा, जहां इसे पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन माना गया। इसके बाद संगठन पर कार्रवाई तय मानी जाने लगी। प्रदेश नेतृत्व की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि मौजूदा जिलाध्यक्ष और उनकी टीम पार्टी के उद्देश्यों के अनुरूप प्रभावी नहीं रह गई थी। आदेश की प्रतिलिपि प्रदेश स्तर के साथ-साथ सीधे राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव और राष्ट्रीय अध्यक्ष कार्यालय को भी भेजी गई है। अब बरेली की राजनीति में नए जिलाध्यक्ष और संभावित प्रभारी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। सभी की निगाह इस पर टिकी है कि नई टीम के गठन के बाद सपा बरेली में संगठन को कितनी मजबूती दे पाती है और चुनावी मैदान में क्या असर दिखता है।
चुनाव से पहले सख्त संदेश
चुनावी साल से पहले सपा नेतृत्व के इस फैसले को सख्त लेकिन स्पष्ट संदेश के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी ने संकेत दे दिया है कि अनुशासनहीनता, गुटबाजी और विवाद अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। संगठन में अब चेहरे नहीं, बल्कि प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रदेश कार्यकारिणी में जगह
दिलचस्प बात यह रही कि सोमवार शाम शिवचरण कश्यप को एक ओर जिलाध्यक्ष पद से हटाया गया, वहीं तुरंत बाद उन्हें प्रदेश कार्यकारिणी का सदस्य भी बना दिया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवचरण कश्यप ने कहा कि वह पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता थे और रहेंगे। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे वह ईमानदारी से निभाएंगे।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।
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