
राहत: यमुना नदी का जल स्तर घटकर हुआ 1.34 हजार क्यूसेक
Saharanpur News - लगातार कई दिनों से बाढ़ के खतरे के बीच यमुना नदी के जल स्तर में कमी आई है, जो तटवर्ती लोगों के लिए राहत की खबर है। हथिनीकुंड बैराज से पानी का स्तर घटने से स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि,...
लगातार कई दिनों से बाढ़ के खतरे के बीच यमुना नदी के जल स्तर में कमी आना नदी के तटवर्ती इलाकों के लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी का स्तर घटने से नदी किनारे बसे गांवों के लोगों के साथ महकमे ने भी चैन की सांस ली है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ऊपर पहाड़ी इलाकों के साथ मैदानी क्षेत्रों में बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने लगी है, जिसका सीधा असर जल स्तर पर दिखाई दे रहा है। शनिवार को सुबह आठ बजे हथिनीकुंड बैराज से 1,42,604 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जबकि शाम चार बजे तक यह घटकर 1,34,594 क्यूसेक पर पहुंच गया।

तीन बजे यह आंकड़ा 1,32,295 था। अधिकारियों के अनुसार कल अधिकतम 1.83 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिसके बाद से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे उम्मीद जगी है कि अगले 24 घंटे में स्थिति और तेजी से सामान्य की ओर जाएगी। हालांकि, खतरा पूरी तरह टलने तक प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। कई गांवों में अभी भी जमीन का कटाव जारी है और खेतों में जलभराव के कारण फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। धान, गन्ना, हरे चारे, दलहन और सब्जियों की फसल पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। कई किसानों ने बताया कि खेतों में लंबे समय तक पानी भरने से फसल गल रही है, जिससे लागत तक निकलना मुश्किल होगा। सिंचाई बाढ़ नियंत्रण से जुड़े अफसरों का कहना है कि यदि पानी का स्तर इसी तरह घटता रहा तो हालात जल्द काबू में आ जाएंगे। राहत की बात यह है कि मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना से इंकार किया है। कुल मिलाकर, यमुना का घटता जल स्तर इस समय ग्रामीणों और प्रशासन दोनों के लिए राहत की सांस लेकर आया है, हालांकि फसलों को हुए नुकसान की भरपाई एक बड़ी चुनौती रहेगी।

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