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यूपी पुलिस ने छोड़ा मूंछों को ताव देना

हिन्दुस्तान टीम,सहारनपुरNewswrap
Wed, 27 Oct 2021 12:35 PM
यूपी पुलिस ने छोड़ा मूंछों को ताव देना

चेहरे पर रौबदार मूंछे, ताव और तेवर। कभी यही पहचान थी पुलिस की। घुमावदार और कड़क मूंछें बरकरार रहें इसके लिए उनको भत्ता दिया जाता है। अंग्रेजों के जमाने से यह सिलसिला चल रहा है। लेकिन यूपी में मूंछ भत्ता लेने वालों की संख्या घट गई है। अकेले मेरठ में एक पुलिसकर्मी को भत्ता मिल रहा है। पुलिस में नौजवानों की आमद ने पुलिस का चेहरा बदल दिया है। मूंछ की पूछ कम हो गई है।

1977 में जारी हुआ था शासनादेश

मूंछों का संबंध रौब और हनक से है। अंग्रेजों के जमाने से मूंछ फोर्स का हिस्सा रही है। बताते हैं कि घुड़सवारी दल रौबदार मूंछे रखता था। अंग्रेज उसके लिए ईनाम भी देते थे। कुछ सैन्य और अर्धसैनिक बलों में अभी भी यह प्रचलन में है। यूपी पुलिस में वर्ष 1977 में इसके लिए शासनादेश जारी हुआ और वर्ष 1982 में सबसे पहले किसी पुलिसकर्मी को मूंछ भत्ता दिया गया। लखनऊ के तत्कालीन एसएसपी बीएस बेदी ने तब प्राइवेट फंड से 20 रुपये प्रतिमाह मूंछ भत्ता जारी किया था। अब इसके लिए अधिकतम 250 रुपये मिलते हैं।

ऐसे मिलता है मूंछ-भत्ता

- मूंछ रखने वाला पुलिसकर्मी अपने रिपोर्टिंग अफसर के माध्यम से पुलिस लाइन में आरआई को प्रार्थना पत्र भेजता है।

- इसके बाद यह पत्र एसएसपी कार्यालय में भेजा जाता है। यहां एक कमेटी मूंछों का निरीक्षण और नापतोल करती है।

- लंबाई-चौड़ाई की नाप के बाद संस्तुति होती है और अकाउंट विभाग को आदेश जारी किया जाता है। इसके बाद मासिक वेतन में ये भत्ता मिलने लगता है।

मूंछों के मानक

- कम से कम कलमों तक जाती हों।

- रौबदार हों, सुंदर हों।

- घनी हों और उन मूंछों से चेहरे पर रौब दिखाई देता हो।

ऐसे होती है देखभाल

रौबदार मूंछों की देखभाल भी आसान नहीं। पुलिस जवान बताते हैं कि इसे संवारने के लिए रोजाना आधे से एक घंटे तक का समय लगता है। चेहरे पर मूंछ फबे इसके लिए बेहतर डाइट, हर्बल उपचार, मॉश्चराइजर, क्रीम, शैंपू व कंघी का नियमित इस्तेमाल करना होता है।

मेरठ के विजय प्रताप 30 साल से ले रहे भत्ता

मेरठ पुलिस के विजय प्रताप सिंह राठौर पिछले 30 वर्षों से मूंछों के रखरखाव को लेकर भत्ता ले रहे हैं। वह आईजी मेरठ कार्यालय में अनुचारक के पद पर कार्यरत हैं। वह अकेले पुलिसकर्मी हैं जिनको मूंछ भत्ता मिल रहा है।

सूबे में अब गिने-चुने लोगों को ही मिल रहा मूंछ भत्ता

मूंछों की लंबाई-चौड़ाई के आधार पर पुलिस और पीएसी में विशेष भत्ता दिया जाता है। हालांकि, अब सूबे में गिने-चुने जवान ही मूंछ भत्ता ले रहे हैं। मेरठ-सहारनपुर मंडल में सिर्फ एक ही पुलिसकर्मी को भत्ता मिल रहा है। लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, मुरादाबाद और बस्ती मंडल में भी फिलहाल किसी पुलिसकर्मी को मूंछ भत्ता नहीं मिल रहा है।

आगरा में 2019 के बाद मूंछ भत्ता नहीं लिया

सितंबर 2019 के बाद आगरा में किसी ने मूंछ भत्ता नहीं लिया। आखिरी बार एसएसपी बबलू कुमार ने राम बारात के प्रभारी दरोगा को उनकी मूंछों पर प्रसन्न होकर पांच सौ रूपये दिए थे।

वर्जन

अलग तरीके से रौबदार मूंछे रखने पर इनाम के तौर पर भत्ता दिया जाता था। इसके लिए आवेदन करना होता है लेकिन, अब कोई पुलिसकर्मी इस तरह की मूंछ रखता ही नहीं है। अधिकतर पुलिसकर्मी या तो क्लीन शेव हैं या फिर छोटी मूंछे ही रखते हैं।

-राजेश कुमार, एसपी सिटी, सहारनपुर

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