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23 सितम्बर, 2020|10:02|IST

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मदरसों में दी जाने वाली तालीम का पाठ्यक्रम एक जैसा हो: दारुल उलूम मोहतमिम

मदरसों में दी जाने वाली तालीम का पाठ्यक्रम एक जैसा हो: दारुल उलूम मोहतमिम

दारुल उलूम के नेतृत्व में संचालित मदरसों की संस्था कुल हिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया की बैठक में दारुल उलूम मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि मदरसों के संचालन में पारदर्शिता होना आवश्यक है। उन्होंने मदरसा संचालकों से आह्वान किया कि वह मदरसों में दी जाने वाली तालीम का स्तर दुरुस्त करने के लिए एक जैसा पाठ्यक्रम होना आवश्यक है।

गुरुवार को हाईवे स्थित मदरसा जकरिया में आयोजित कुल हिंद राब्ता-ए-मदारिस इस्लामिया (जोन नंबर एक) के चौथे इजलास में शिरकत करते हुए कहा कि आपसी सम्बंध जितने मजबूत होंगे मदरसों को उतनी ही मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि आपसी संबंधो के बल पर हर समस्या का समाधान आसानी से हो सकता है। मुफ्ती अबुल कासिम ने मदरसा संचालकों से कहा कि उन्हें अपने मदरसों का स्तर ऊंचा करने के लिए चाहिए कि सभी मदरसों में दारुल उलूम में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम को अपने यहां शामिल करना चाहिए। दारुल उलूम मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने मदरसा संचालकों से कहा कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पाठ्यक्रम की कौनसी किताब कब पढ़ानी है और कब समाप्त करनी चाहिए। इसके लिए समय निर्धारित होना जरुरी है। उन्होंने सभी मदरसा संचालकों से एक दूसरे की हरसंभव मदद करने का भी आह्वान किया। कुल हिंद राब्ता-ए-मदारिस के नाजिम (प्रभारी) मौलाना शौकत अली बस्तवी ने मदरसा प्रबंधतंत्र से आह्वान किया कि वह मदरसों में बेहतर तालीम और बेहतर माहौल बनाए। उस्तादों (अध्यापकों) को चाहिए कि तलबा को कौम की अमानत समझ उनको बेहतर तालीम अदा करें दारुल उलूम के पूर्व नायब मोहतमिम मौलाना कारी उस्मान मंसूरपुरी ने कहा कि मदरसों का बुनियादी मकसद इस्लाम की हिफाजत है, जिस पर मदरसों को जमे रहना आवश्यक है। इस्लाम मजहब के मानने वालो के खिलाफ आए दिन षडयंत्र रचे जा रहे हैं जिनका जवाब समझदारी से देना आवश्यक है। जलसे का आगाज मौलाना जुबैर कासमी की तिलावत व हकीम लुकमान की नात-ए-पाक से हुआ। जलसे में मदरसों के भीतरी निजाम से सम्बंधित विभिन्न तजावीज (प्रस्ताव) पेश कर उनपर विचार विमर्श किया गया। इस दौरान मौलाना मोहम्मद आकिल कासमी, कारी मसऊद फलाही, मौलाना इस्माईल सादिक, मौलाना सुलतान, मौलाना अजीजुल्लाह नदवी, मौलाना तैयब कासमी, मुफ्ती अयूब साबित समेत विभिन्न मदरसों के मोहतमिम एवं जिम्मेदार मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक मौलाना शरीफ कासमी ने सभी का आभार जताया।

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  • Web Title: The syllabus given in Madrasas should be same Darul Uloom Mohatamim