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भ्रष्टाचार को समाप्त करने का सटीक माध्यम है आरटीआई : सूचना आयुक्त

भ्रष्टाचार को समाप्त करने का सटीक माध्यम है आरटीआई : सूचना आयुक्त

राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान की अध्यक्षता में बुधवार को सर्किट हाउस में जनसूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों को सूचना का अधिकार नियमावली-2015 के प्रावधानों का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि जनसूचना अधिकारी का मुख्य दायत्वि सूचना देना है।

सूचना अधिकारी को किस बिल्डिंग में कौन सा बालू, सरिया आदि लगा है, उसकी भी जानकारी देनी होगी। पांच सौ शब्दों से अधिक में दिये गए प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दें। प्रशिक्षण के बाद राज्य सूचना आयुक्त ने पत्रकारों से वार्ता की।राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि प्रार्थना पत्रों के साथ दस रुपये पोस्टल आर्डर नही लगा है तो निरस्त किया जा सकता है। प्रार्थना पत्र प्राप्त होने पर सम्बन्धित को 30 दिन के अन्दर सूचना देनी होगी। यदि प्रार्थना पत्र सम्बन्धित अधिकारी के विभाग से सम्बन्धित नहीं है तो वह उसे छह दिन के अन्दर प्रत्येक दशा में उस विभाग को स्थानान्तरण कर देगा। इस क्रान्तिकारी अधिनियम से सीधे जनता को पावर दी गई है। इसके लागू हो जाने से गुड गर्वेनेन्स को भी बढ़ावा मिला है। प्रत्येक कार्य में पारदर्शिता, उत्तरदायत्वि एवं जवाबदेही सुनश्चित हो रही है। अपीलीय अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा इसे बोझ न समझे। यदि कोई आवेदक निर्माण हो रहे किसी सरकारी भवन में कौन सा बालू, सीमेंट, टाईल्स, ईट, सरिया लगाये गये की भी सूचना मांगता है तो सम्बन्धित को देना होगा। सभी अधिकारियों को अपने विभाग में आरटीआई आवेदन पत्र रजिस्टर बनाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर राज्य सूचना आयोग रजिस्टर तलब कर सकता है। रजिस्टर में आवेदनकर्ता ने किस तिथि में प्रार्थना पत्र दिया औरप्रार्थना पत्र के निस्तारण में क्या-क्या कार्यवाही की गयी, अंकित करनी होगी। यह भी जोड़ा कि 20 साल से ज्यादा की सूचना नहीं दी जा सकती है। कोई आवेदक जानबूझकर परेशान करने की नियत से बार-बार सूचना मांगता है तो ऐसे आवेदको के बारे में अवगत करायें। आयोग कार्यवाही करेगा।

उन्होंने कहा कि आरटीआई का दुरुपयोग और अधिकारियों का ब्लैकमेल न करें। यदि किसी आवेदक को किसी से सूचना मांगने पर सुरक्षा का खतरा हो तो वह जिला प्रशासन व आयोग को बतलाये। जांच के बाद नियमों के तहत सुरक्षा उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने सभी जनसूचना अधिकारियों को कार्यालयों में नेम-प्लेट व मिलने का समय अंकित कर टांगने की निर्देश दिये। यदि किसी योजना की जांच चल रही है तो सूचना न दे, जांच पूरी होने पर सूचना प्राप्त कराये। बीपीएल श्रेणी के आवेदकों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। सभी जनसूचना अधिकारियों व प्रथम अपीलीय अधिकारियों को सूचना का अधिकार की एक हस्त-पुस्तिका भी प्राप्त कराई गयी। हस्तपुस्तिका में नियमों, उपनियमों, धाराओं, शासनादेशों, कार्यालय ज्ञापनों, की सम्पूर्ण जानकारी शामिल है। स्टेट रिर्सोस पर्सन राहुल सिंह ने सूचना का अधिकार नियमावली-2015 के तहत नियम व विभन्नि प्रारूपों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर मण्डलायुक्त सीपी त्रिपाठी, डीआईजी शरद सचान, एसएसपी उपेन्द्र अग्रवाल, नगर आयुक्त ज्ञानेन्द्र सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रेनू तिवारी, एडीएम के अलावा सहायक निदेषक सूचना सुधीर कुमार मौजूद रहे।

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  • Web Title: The correct medium for ending corruption is RTI Commissioner of Information